स्थानीय ज्ञान की महत्ता और आधुनिक नॉलेज मैनेजमेंट सिस्टम

साल 2017 की बात है नौवीं शोधयात्रा के दौरान दोपहर के समय मैंने जम्मू के आउटस्कर्ट्स में एक मंदिर में शरण ली हुई थी और वहां पैदल यात्रा मध्यप्रदेश से भी आई हुई थी। बड़ा शोर शराबा था और मैं भयंकर थका हुआ। लगभग दो घंटे बाद सोकर उठा और महुँ पर पानी शानी मार कर नगरोटा की ओर बढ़ने का मूड बनाया तो देखा कि मध्य प्रदेश से आई यात्रा में दोपहर का लंगर पक रहा था

मैंने गर्म तवे पर सिकती हुई रोटियो के बीच में पड़े ईंट के आधे टुकड़े ने मेरा ध्यान आकर्षित किया।लंगर टीम के अध्यक्ष श्रीमान महेंद्र जी जो रोटियां बेलने में व्यस्त थे , से मैं इस ईंट के टुकड़े की प्रासंगिकता पूछ बैठा।जनाब ने बताया कि हमें तेज आंच पर स्पीड से रोटियां बनानी होती हैं जो कि हम गैस भटटी पर बनाते हैं।तवे के ये डिजायन लकड़ी की आग से चलने वाली भट्ठी के हिसाब से बने हुए हैं। जहां आंच का दायरा बड़ा होता है।

गैस भट्टी में सीमित एरिया में आंच अधिक होती है जिससे पूरे तवे का तापमान अलग अलग जगह पर अलग अलग हो जाता है। जिसकी वजह से केवल ट्रैंड महाराज ही रोटी बना सकता है सबके बस की बात नही होती है।अपनी स्थानीय सूझबूझ से इन ग्रामीण लोगों ने एक ईंट के आधे टुकड़े से एक इवन हीट डिस्ट्रिब्यूटर बना लिया है जो बड़ी एफिशिएंसी से पूरे तवे पर हीट डिस्ट्रीब्यूशन करता है।

तकनीक एक दम कामयाब है बड़ी स्पीड से तेज आंच पर कोई अनाडी भी रोटी सेंक सकता है।आज तक मैंने हीट सिंक सुने थे, क्योंकि कम्प्यूटर चिप में प्रोसेसिंग की वजह से बहुत हीट निकलती उस हीट से चिप को बचाने के लिए एल्युमीनियम के हीट सिंक लगाए जाते हैं।लेकिन आज हीट डिस्ट्रिब्यूटर के कॉन्सेप्ट ने दिमाग में चांदना सा कर दिया है।हालांकि यह इनपुट एक डिजायन चेलेंज हो सकता है।

NID में पढ़े डिज़ाइनर एक नया तवा डिज़ाइन कर सकते हैं।मुझे बहुत आनंद आता है जब मैं अपने देश के लोगों को बड़ी बड़ी समस्याएं चुटकियो में अपनी सूझबूझ से हल करते हुए देखता हूँ।

अभी कुछ दिन पहले ही मेरे एक मित्र अपनी पोस्ट में लिखे बैठे थे के बताओ भारत ने कितने पेटेंट करवाये। अरे भाई साहब ये देश पेटेंट की सोच वाला देश ही नही है यहां तो ज्ञान पर समानाधिकार की बात सदियों से लोगों के संस्कारो में है।इस देश में इतना ज्ञान बिखरा है चप्पे चप्पे पर के पेटेंट दफ्तरों की औकात नही है के इतने पेटेंट ग्रांट कर दे।