जलेबियाँ का रेट

एक बार की बात है एक छोरा बाज़ार मैं गया और वो हलवाई की दूकान के आगे जा कै खड़ा हो गया उड़े बढ़िया गरमा गर्म जलेबियाँ उतरण लाग रही थी जेब में एक भी रापिया धेला किमे था नहीं उसने सोची छोड्ड ना यार पहल्यां तू जलेबियाँ समार ले फेर देखांगे अर एक किलो जलेबी तुलवा ली अर खा गया चालन लाग्या तो हलवाई बोल्या ओ भाई ल्या रै जलेबियाँ के रपिये दे वो छोरा बोल्या लाला जी रपिये तो कोन्या , हलवाई कै उठ गया छो गेर कै नीचे तसल्ली तै ओसन(पीट) दिया बस वो छोरा झाड झूड …

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समाज सेवा और सम्मान

नारायणगढ़ सिविल हॉस्पिटल में सुबह आठ बजे मेरे एक मित्र श्रीमान अजय वालिया जी दिखाने के लिए ओपीडी की लाइन में लगने लगे तो उसने देखा कि लाइन अभी लंबी है इधर पेट मे चूहे कूद रहे थे तो अपने से आगे वाले को बोल कर नज़दीक की दुकान से एक सैंडविच और पीने के लिए लस्सी का पाउच ले आये और लाइन की साइड में बैठ कर खाने लगे तभी उनका ध्यान एक आठ साल के बच्चे ने आकर्षित किया जो बेहद भूखी ललचाई नज़रों से उसे देख रहा था। उनसे रहा नही गया और उन्होंने इशारों ही इशारों …

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छोटे काम का बड़ा नतीजा पेंटर और नाव वाला किस्सा

एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया और अपनी नाव दिखाकर कहा कि इसको पेंट कर दो । पेंटर ने उस नाव को लाल रंग से पेंट कर दिया जैसा कि नाव का मालिक चाहता था। फिर पेंटर ने अपने पैसे लिए और चला गया । अगले दिन, पेंटर के घर पर वह नाव का मालिक पहुँचा और उसने एक बहुत बड़ी धनराशि का चेक उस पेंटर को दिया। पेंटर भौंचक्का हो गया और पूछा ये इतने सारे पैसे किस बात के हैं ?मेरे पैसे तो आपने कल ही दे दिया थे । मालिक ने कहा भाई, ये पेंट का …

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करोना जैसों की काट भारतीय संस्कृति

राम युग में दूध मिलेऔर कृष्ण युग में घीकोरोना युग में काढा मिलेडिस्टेंस बना कर पी जब दुनियाँ लेके बैठी हैबड़े-बड़े परमाणुपर ठोक गया उसे एकछोटा सा विषाणु कल रात सपने मेंआया कोरोनाउसे देख जो मैं डरा 😢और शुरू किया रोनातो, मुस्कुरा 😊 केवह बोला मुझसे डरो मतकितनी अच्छी हैतुम्हारी संस्कृति न चूमते, न गले लगातेदोनों हाथ जोड़करतुम राम राम करतेवही करो नामुझसे क्यों डरते ? कहाँ से सीखा तुमनेरूम स्प्रे, बॉडी स्प्रेपहले तो तुम धूप, दीपकपूर, अगरबत्ती जलातेवही करो नामुझसे बिल्कुल डरो ना शुरू से तुम्हेंसिखाया गयाअच्छे से हाथ-पैरधोकर घर में घुसोमत भूलोअपनी संस्कृतिवही करो नामुझसे बिल्कुल डरो ना …

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दाल और मेहमान

एक बार की बात है एक आदमी अपणी घरआली तै बोल्या: आज मेरे दफ्तर के यार खाणा खाण आवेंगे कीमे आछ्या बणा लिए घरआली बोली: जी घर नै तो कीमे ना बच रहया बस दाल ए सै! आदमी बोल्या बस तू दाल ए बणा लिए और वे आवेंगे जद भीतर तै बर्तन नीचै पटके जाइए, मैं कहूँगा के होया तूकहिये खीर पड़गी, फेर कहिये हलवा पड़ग्या, नु करदे करदे सारी चीज गिणा दिए! फेर मैं कहूँगा के बच्या सै तू कहिये दाल बची सै,मैं कहूँगा वा ए लिया! उसकी घरआली बोली ठीक सै.मेहमान आए!! भीतर तै बर्तन गिरण की आवाज …

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शेरो शायरी कलेक्शन

हरियाणा कृषि विश्विधालय में मैं साल 1997 से लेकर मार्च 2000 तक बतौर डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी का छात्र रहा और साल 1998 में हमारे से जूनियर बैच में एक साथी आया महावीर डांगी। जो डॉ डैंग के नाम से हमारे आपसी जूनियर सीनियर भाई चारे में आगे चलकर मशहूर हुआ। महावीर की खासियत यह थी कि उसे सैंकड़ों हज़ारों शेर याद थे और किसी भी स्थिति पर वो शेर सुना सकता था। मैं हमेशा यह सोचता था कि कभी समय लगेगा तो मैं जीवन में एक शेरो शायरी का कलेक्शन बनाऊंगा। लेकिन चवन्नी अठन्नी की दौड़ में …

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ताई की गवाही आला मुकद्दमा

एक बार एक मुक्कदमे में ताई गवाह बना दी ! ताई जा के कटघरे में खड़ी हो गयी और बाई चांस दोनू वकील भी ताई के गाम के ही थे पहले वकील नै बात शुरू करण के मारी ताई तै पूछ्या “अक ताई तू मन्ने जाने है? ताई बोली “हाँ रै तू रामफूल का है ना तेरा बाबू तो भाई घणा सूधा आदमी था पर तू कत्ति निक्कमा लिकडया मन्ने सुण्या है तू नम्बर का झूठा है और झूठ बोल बोल कै तूं वकील बण कै लोग नै ठगे है आर निरे झूठे गवाह बना के तू केस जीते है …

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ताऊ रामफल और स्वर्ग की चाह

एक बार की बात है के ताऊ रामफल का अच्छा ब्योंत हो गया और जब पैसे पूसे ठीक ठाक हो गए तो ताऊ रामफल ने अपने सारे शौक़ पूरे कर लिए डबल एम् ऐ की पढ़ाई से ले कर सारे महंगे सस्ते शौक़ आजमा लिए लेकिन दिल नहीं भरा फेर भी कसर रह गयी , एक दिन टी.वी. पर रामायण देखते देखते ताऊ ने सोच्या के अक अब भगवान् की प्राप्ति करणी चाहिए। किताब कुतूब पढ़ कै देखि लेकिन कोई तार कनेक्शन फ्यूज कुछ नहीं मिला राम के गाम का। एक दो महंतो के पास उठा बैठ करी तो वो …

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