चावल का फोर्टीफिकेशन और हमारा भविष्य

दीपक राघव इस तरह के अनाज आगे जाकर कैंसर का कारण बनेंगे प्रकृति के साथ खिलवाड़ अब हमारे देश में एक नया षड्यंत्र कंपनियां करवा रही हैं, जिसमें गरीबों को मिलने वाले चावल को फोर्टिफाइड करने की घोषणा कर रहे हैं “राशन की दुकान पर मिलने वाला चावल हो, मिड-डे मील में बालकों को मिलने …

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श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे। •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन …

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सनातन संस्कृति का मजबूत अंग है हमारा बाल्मीकि समाज

कैसे है वाल्मीकि समाज सनातनधर्म का अभिन्न अंग अरुण लवानिया अंग्रेजों के समय से ही सनातन की इमारत से एक एक कर ईंटों को सरकाने का षड़यंत्र चला आ रहा है। इसके पीछे जिसका भी का हाथ है उसका चेहरा हमसे अब छिपा नही है , कागजी स्वतंत्रता यानी ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर के पश्चात उपजी …

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पूंजी के पहाड़ से निकलेगा किसानों और कारीगरों की समस्या का समाधान।

मसला आज दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच चुकी है जहां सब कुछ पूंजी के सहारे चल रहा है और बड़े बड़े आर्थिक किले हमारे चारों और उद्योगपतियों ने बनाये हैं जिनकी मदद से वो सुबह शाम दिन रात अपने प्रोडक्ट्स एवं सर्विसेज के माध्यम से पैसा खींच रहे हैं। ग्रामीण इकॉनमी में पैसा आता …

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प्रासंगिक हैं राष्ट्रनायक राजा महेंद्र प्रताप

मथुरा से जब आप हाथरस की ओर चलेंगे तो हाथरस जिले में प्रवेश करते ही एक कस्बा पड़ेगा मुरसान। मुरसान एक छोटा सा कस्बा है। वहां के राजा थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह। राजा महेंद्र प्रताप उन विलक्षण और प्रतिभाशाली स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में से एक रहे हैं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ भारत …

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शूद्र एक घृणित सम्बोधन कब हुआ किसने किया और कैसे किया क्यों किया ? एक विश्लेषण

त्रिभुवन सिंह ऋग्वेद मे लिखा है ब्राम्हण्म मुखम आसीत शूद्रह अजायत। अर्थात परंब्रम्ह की जिह्वा है ब्रामहण । यानि जो तपस्या (रेसेर्च ) से जो मांनव कल्याण हेतु जो मंत्र खोजे जाते है , उसी को जिह्वा से जगत मे प्रचारित प्रसारित करने वाले को ही ब्रामहण कहते हैं । दूसरी बात उस परम्ब्रंह की …

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जलेबियाँ का रेट

एक छोरे का किते भी ब्याह ना होवै था , एक दिन वो छो(गुस्सा) मै आके न्यू सोची चाल ब्याह तो जब होगा देखि जागी,जलेबी तै खा ऐ ल्यूं हलवाई की दूकान पै गया अर एक किलो जलेबी तुलवा ली अर खा गया चालन लाग्या तो हलवाई बोल्या ओ भाई ल्या रै जलेबियाँ के रपिये …

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डोभ वाली क्रिएटिव दादी गंगा देवी

मेरे जीवन मे जब जब ज्ञान से अपनी जीने की राह निकालने का सवाल आता है तो सबसे ऊपर दादी गंगा देवी जी का नाम आता है। दादी गंगा देवी ने बचपन मे खेतों में काम करते करते स्कूल के आते जाते बच्चों के साथ खेल खेल कर गिनती पहाड़े सीख लिए,बिल्कुल अनपढ़ होने के …

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गौपालन गौसंरक्षण गौसंवर्धन गौशालाएं और कानूनी अडचनें और संभावनाएं

महक सिंह तरार और कमल जीत भूमिका गाय सनातन की आर्थिक धुरी है और धर्म के मूल में जो अर्थ होता है वह असल में गाय ही होती है। चूंकि गाय सनातन इकनोमिक सिस्टम की करंसी है इसी लिए जो हालात आज गाय की हो रखी है वही हालात हमारी करंसी अरतार्थ मुद्रा के हो …

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एक सीधा सवाल देश के किसानों से

इस देश में आत्मविश्वाश और आत्म निर्भरता का रास्ता केवल और केवल और खेतों से जाता है। हम जैसे नौकरी पेशा, बिना जमीन और बिना गाय वाले लोग संडे को सपरिवार खेतों में घूमने चले जाएं तो सड़कों और मॉल्स में से भीड़ छंट जाएगी और खेतों में रौनकें बढ़ेंगी। वहां अपन को फुलस्टॉप लगा …

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