रेज़ांग ला में लड़ने वाली चार्ली कंपनी का हर जवान हीरो था

राजीव पुरोहित बात फ़रवरी 1963 की है. चीन से लड़ाई ख़त्म होने के तीन महीने बाद एक लद्दाखी गड़ेरिया भटकता हुआ चुशूल से रेज़ांग ला जा पहुंचा। एकदम से उसकी निगाह तबाह हुए बंकरों और इस्तेमाल की गई गोलियों के खोलों पर पड़ी. वो और पास गया तो उसने देखा कि वहाँ चारों तरफ़ लाशें ही लाशें पड़ी थी वर्दी वाले सैनिकों की लाशें। “किसी की राइफ़ल टूट कर उड़ चुकी थी, लेकिन उसका बट उसके हाथों में ही था। हुआ ये था कि लड़ाई ख़त्म होने के बाद वहाँ भारी हिमपात हो गया और उस इलाके को ‘नो मैन्स …

Read more

औद्योगिक राष्ट्र भारत के पुनर्जागरण का सबूत है देसी ब्रांड त्रिंजन

भारत कभी भी कृषि प्रधान देश नही था। भारत की गली गली घर घर में इंडस्ट्री थी। भारत में कोई भी जगह ऐसी नही है जहां की कोई चीज मशहूर न हो।पुराने किसान बताते हैं कि अक्टूबर से मार्च तक उन्हें सर उठाने तो दूर मरने की भी फुर्सत नही मिलती थी क्योंकि गुड़ बनाने का काम बहुत जोरशोर और दिल लगा कर किया जाता था। कृषि का सारा सामान परिष्कृत रूप में गांव से बाहर निकलता था। किसान का पूरा परिवार मूल्यवर्धन और संबंधित व्यवस्थाओं में लगा रहता था।पंजाब के फरीदकोट जिले के कोटकपूरा टाउन में रहने वाले सरदार …

Read more

खेती विरासत मिशन के मंथन से उपजा है देसी ब्रांड त्रिंजन

माता गुरचरण कौर जी कहती हैं कि मैं चरखा चला कर सूत कातने के साथ साथ अपना दुःख काट लेती हूँ।इस चरखे का महत्व हम न खुद समझ सके और न देश की मुख्य धारा में इसको शामिल कर सके।हमारे गांवों में बसे बढई देवता किस स्तर के सिद्धहस्त और तकनीकी लोग हैं। इसका पता उनके बनाये हुए यंत्रों को देख कर पता चलता है। हमने अपने पूरे एजुकेशन सिस्टम को सिर्फ नौकरी मांगने वाले बेरोजगार बनाने के हिसाब से क्रिएट किया है।गांधी जी मे चरखा चला कर आत्मिक बल आ जाया करता था लेकिन हमने चरखे का मूल्य नही …

Read more

जहर में डूबते पंजाब को उबारने में लगे बाबा उमेन्द्र दत्त

ये बाबा Umendra Dutt जी हैं जो जैतो पंजाब में रहते हैं। पंजाब जैसे जहर मे चौबीस घंटे डूबे प्रदेश को साल 2005 से बाहर उबारने में जुटे हैं। इनका किया हुआ काम पंजाब में नज़र आता है। मुझे कोई साल भर में एक आध बार इनसे रूबरू होने का मौका मिल ही जाता है। दिन भर ये भी मेरी तरह खूब कीबोर्ड पीटते हैं।शाम को ये लैपटॉप को उसकी जगह से उठा कर नई पोजिशन में सेट कर लेते हैं और पीठ सीधी करते करते अपनके काम करने लगते हैं।यहां पर कोई कृपया ज्ञान न दे, ये संतों की …

Read more

साफ़ समझ का समाज

कैथल क्षेत्र के गांवों में किसान खेतों में कूप आदि निर्माण करते हैं और उसके ऊपर घिया तौरी कद्दू पेठा की बेलें चढ़ा देते हैं। कल ऐसे ही एक कूप के ऊपर चढ़ कर मैंने भी घिया का निरीक्षण किया था। उसी फोटो को देख कर एक सूझवान मित्र का सुझाव आया था कि बेल में वेजिटेटिव ग्रोथ अधिक है इसमें प्रूनिंग की जाए तो ज्यादा उत्पादन मिलेगा। ज्यादा उत्पादन सुनकर मुझे भी जोश आया कि शाम को सूझवान मित्र से बुजुर्ग किसान भाग सिंह जी का वार्तालाप करवाऊंगा। शाम को वापिसी लौटते समय जब भागसिंह जी की बैठक में …

Read more

भारत की इस्लामी फतह : विल ड्यूरन्ट

यह लेख, विल ड्यूराण्ट के The Muslim Conquest of India का गूगल ट्रांसलेशन है, केवल व्याकरण की भूलें सुधारी हैं। विल ड्यूराण्ट अमेरिकन इतिहास लेखक थे, आप उनके बारे में गूगल पर Will Durant सर्च कर के अधिक जानकारी ले सकते हैं। उनके ग्रंथ नेट पर मिल जाएँगे, A Case For India भी उपलब्ध है। लेख लंबा है, लेकिन अवश्य पढ़ें। अनवाद करने का कष्ट इसलिए किया है क्योंकि इंग्लिश कम लोग पढ़ पाते हैं । अत: इसे अवश्य पढ़ें और मित्रों तक भी पहुंचाएँ। आज जो इन लोगों को अपने पूर्वज मानना चाहते हैं उनकी मानसिकता का विश्लेषण अन्य …

Read more

फ़ूड फ़ॉर थॉटस वर्टिकल फार्मिंग

वर्टिकल फार्मिंग आज कोई नया सब्जेक्ट बेशक़ होगा लेकिन हरियाणा पंजाब के देहातों में ये आदिकाल से होती आई है। जो बात सबसे बेहतर है वो यह है कि तकनीक के किसी एक पक्ष को इतना हावी नही किया जाता है कि वो त्रास बन जाये। तकनीक को साधारण सरल और सुघड़ रखना किसानों को बखूबी आता था लेकिन ज्ञान से विमुख करने वाले विज्ञान ने जब से प्रोडक्ट्स एंड सर्विसेज का बफ़े समाज मे प्रस्तुत किया है सब सिस्टम गोलमाल सा हो गया है। चार बार गुल्ली डंडे की स्प्रे करने के बाद भी किसान कहता है कि गुल्ली …

Read more

बाजरा एक बहुमूल्य अनाज

बाजारा ,सांवा,सामा,कोदो , रागी, जौ, कुटकी ,कांगनी ये सब भारत में उत्पादित होने वाले मोटे अनाजों के नाम हैं।हममें से ज्यादातर लोगों ने इन अनाजों का नाम तक नहीं सुना होगा। आपको हैरान की होगी की ये बहुमूल्य अनाज पिछले 6500 सालों से हम भारतीयों का मुख्य आहार हुआ करता था। इससे बने चावल, खिचड़ी हलवा, लड्डू, सत्तू, भुंजा, चूड़ा इत्यादि व्यंजन हमारे पसंदीदा आहार हुआ करते थे। हरित क्रांति के बाद हमारी डाइट सिर्फ चावल और गेहूं तक सिमट के रह गई और हम सबने इन बहुमूल्य अनाजों का दरकिनार कर दिया हैं। आज जब हमारी आबादी का ज्यादातर …

Read more

अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति, नीरजा भनोट

मात्र 23 वर्ष की उम्र मे दुर्दांत #मुस्लिम आतंकियों से भिड़कर अपनी जान देकर 350 से अधिक लोगों की जान बचाने वाली वीरांगना #नीरजाभनोट की #पुन्यतिथि पर #कोटि #कोटि #नमन।नीरजा को भारत का वीरता का #सर्वोच्च #नागरिक #सम्मान #अशोकचक्र, पकिस्तान का #तमगा-ए-इंसानियत और अमेरिका का #जस्टिसफॉरक्राइम अवार्ड मिला और पूरे विश्व में इनको हाइजैक गर्ल के नाम से जाना जाता है। 5 सितम्बर 1986 को भारत की एक विरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 350 यात्रियों को जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भारत के कितने नवयुवक और नवयुवतियां उसका नाम जानते है।कैटरिना कैफ, करीना कपूर, प्रियंका चोपडा …

Read more

ताश के पत्ते और हमारा सनातन विज्ञान

हम ताश खेलते है, अपना मनोरंजन करते है। ताश का खेल हर जगह खेला जाता है। पर शायद कुछ ही लोग जानते होंगे कि ताश आधार वैज्ञानिक है, व साथ साथ ही प्राकृति से भी जुड़ा हुआ है: आयताकार मोंटे कागज़ से बने पत्ते चार प्रकार के ईंट, पान, चिड़ी, और हुक्म, प्रत्येक 13 पत्तों को मिलाकर कुल 52 पत्ते होते हैं। क्रमांक गुण व्याख्या 1. पत्ते एक्का से दस्सा, गुलाम, रानी एवं राजा 2. 52 पत्ते 52 सप्ताह 3. 4 प्रकार के पत्ते 4 ऋतु 4. प्रत्येक रंग के 13 पत्ते प्रत्येक ऋतु में 13 सप्ताह 5. सभी पत्तों …

Read more