रसूख क्या होता है जीवन में इसके क्या मायने होते हैं।

सुनीत धवन (प्लेन ब्ल्यू शर्ट) सीनियर स्टाफ कोर्सस्पोंडेंट The Tribune रोहतक

सुनीत धवन मेरा बहुत पुराना साथी है और एक सही मायनों में पत्रकार है जिसने सच्ची पत्रकारिता से अपनी पहचान स्थापित की है और एक ऐसा प्रभाव कायम किया है जिसे देख कर लगता है कि पत्रकारिता भी एक सम्मानजनक कैरियर है। दीपावली की छुट्टियों में मेरा रोहतक आना हुआ और हम सारे भाई इक्कठे हो गए।

इधर उधर की कई बातों के बाद अचानक रसूख शब्द पर बातें होने लगी तो सुनीत भाई ने रोहतक मेडिकल कॉलेज के एक पुराने और बहुत मशहूर डॉ विद्यासागर जी से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। सुनीत भाई ने बताया कि रोहतक मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एक ही वार्ड ऐसा है जिसका नाम किसी डॉक्टर के नाम पर रखा गया है वो है डॉ विद्यासागर वार्ड जहां मेन्टल पेशेंट्स की देखरेख और ईलाज किया जाता है।

डॉ विद्या सागर एक नेक और बहुत काबिल व्यक्ति थे जो मेन्टल पेशेंट्स की सेवा और ईलाज बड़ी तन्मयता से करते थे। यदि किसी पेशंट के पास दवा खरीदने के पैसे नही होते थे तो वो अपने पास से उन्हें दवा खरीदने के पैसे तक दे दिया करते थे। उनके नाम का बहुत प्रभाव था और आमजन उनकी बहुत इज्जत किया करते थे।

साल 2007 में सुनीत भाई की ट्रांसफर गुरुग्राम में हो गयी और वो वहां से रिपोर्टिंग करने लगे। डेली रूटीन में गुरुग्राम के प्रतिष्ठित लोगों से उनका मिलना जुलना हो जाया करता था। एक दिन उन्हें कोई सज्जन मिले और उन्हें जब पता चला कि सुनीत रोहतक से हैं तो उन्होंने बताया कि उनके एक रिश्तेदार थे डॉ विद्यासागर जिनके नाम से मेडिकल कालेज में एक वार्ड भी है।

सुनीत तुरंत पहचान गए और उन्होंने ने भी डॉ विद्यासागर जी के प्रति कृतज्ञता का भाव ही व्यक्त किया। फिर थोड़ी देर और बातें शातें चली तो डॉ विद्यासागर के रिश्तेदार ने एक पुराना वाकया सुनाया जिससे रसूख क्या होता है उसके बारे में हम कुछ सीख सकते हैं।

एक बार की बात है डॉ विद्यासागर के रिश्तेदार जो रोहतक में ही रहते थे और उनके घर में एक रात को चोरी हो गयी और चोरों ने पूरा गोल्ड ज्वैलरी और कैश पर हाथ साफ़ कर दिया। हाथ मोटा लगा था तो पुलिस कम्प्लेन भी हुई और अखबार वालों तक भी बात गयी।

अगले दिन अख़बार में खबर छपी कि रोहतक में फलानी जगह पर डॉ विद्यासागर के रिश्तेदार के घर में चोरों ने हाथ साफ़ कर दिया और क्या क्या चुराया गया है उसका विवरण भी अख़बार मे छपा था। दिनभर घर मे रिश्तेदारों और जानने वालों का तांता लगा रहा क्योंकि अखबार की खबर तो सभी ने पढ़ ही ली थी।

शाम को जब आने जाने वालों की नफरी कम हो गयी और परिवार खाना शाना बनाने की तैयारी में जुटा था तो घर की घंटी बजी और जब दरवाजा खोला गया तो दो अनजान से लोग थे और उनके हाथों में दो फलों के टोकरे आए एक मिठाई का डिब्बा था और एक बैग कंधे पर लटकाया हुआ था।

एकदम ऐसा लग रहा था कि शगुन देने वाले लोग गलती से भटक कर आ गए हैं। जैसे ही दरवाजा खुला और उन्होंने नमस्ते की और वो सीधा अंदर ही आ गए और इससे पहले कोई कुछ समझ पाता वो ड्राइंग रूम में पड़ी टेबल पर टोकरे मिठाई का डिब्बा और बैग रख कर हाथ जोड़ कर खड़े हो गए।

उनमें से एक बोला जी कल रात आपके घर में जो कांड हुआ है उसमें हाथ साफ हमने किया है। आज दोपहर को जब हमने अखबार में यह खबर पढ़ी के रात जो हमने चोरी की है वो डॉ विद्यासागर के रिश्तेदार हैं तो हमारी आत्मा ने आवाज दी कि सारा सामान लौटा आओ और जाकर माफी मांग लो।

हम दोनों ही थे रात को चोरी करने वाले ये दो फ्रूट के टोकरे और मिठाई का डिब्बा हमारी तरफ से और ये बैग जो मेज पर रखा है उसमें वो सारा सामान है जो रात को हमने आपके घर में सेंध लगाकर पार किया था। फिर उन्होंने कहा कि ये हम बैठे आपका मन करे तो हमें माफ़ कर दो और यदि आप चाहें तो पुलिस बुलवा लो हम अपनी गिरफ्तारी भी खुशी खुशी दे देंगे।

परिवार दौड़ कर उस बैग के नज़दीक खड़ा हो गया और उन्होंने जब बैग को खोल कर देखा तो उसमें वो सारा सामान ज्यों का त्यों पड़ा था जो कल रात चोरी हो गया था। जब परिवार की सांस में सांस आयी और उन्होंने चोरों की तरफ देखा तो उनमें से एक बोला कि डॉ विद्यासागर जी बड़े नेकदिल इंसान हैं। अभी कुछ दिन पहले ही मैं अपना एक मरीज़ लेकर उन्हें दिखाने गया था तो मरीज को दवा के पैसे उन्होंने अपनी जेब से दिए थे।

हमारे बहुत सारे लोगों ने डॉ विद्यासागर जी से अपने मरीज ठीक करवाये हैं।हम उनकी बहुत इज्जत करते हैं और आपके घर मे चोरी करके हमने जो आपको दुख दिया है उसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं। परिवार ने उन चोरों को माफ कर दिया और अपना खोया हुआ सामान वापिस पा लिया।

लेकिन इस घटना से यह बात जरूर समझ मे आ गयी कि रसूख किस चीज का नाम होता है। आजकल के दौर में जब हम सैलरी पैकेज पर फोकस करते हैं और सारा दिन धन कमाने के उपक्रमों में ही व्यस्त रहते हैं। रसूख जैसा एसेट हमारी प्रायोरिटी में ही नही होता है। जबकि यह एक ऐसा धन है जो मनुष्य के जीते जी ही नही उसके दुनिया से चले जाने के बाद भी उसके प्रभाव को कायम रखता है।

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