बुल्ली बाई एप्प

भूमिका

इंटरनेट पर www.github.com एक ऐसा मंच है जहां पर वेब और एप्प डेवेलोपेर्स आपस मे इंटरेक्शन एवं कोड शेयरिंग करते हैं। लेकिन यह मंच एक बड़े बेहूदे मामले में आज चर्चा में आया है। इस मंच पर एक मोबाइल एप्प की नीलामी रखी गयी जिसका नाम बुल्ली बाई एप्प था।

मसला

मामला यह है कि उत्तराखंड की एक युवती जो अभी मात्र 18 साल की है जिसके माता पिता का देहांत हो चुका है और वो तीन बहनों में से दूसरे नम्बर पर है और एक बिहार का रहने वाला इंजीनियरिंग का छात्र जो बेंगलुरु में पढ़ता है दोनों ने मिलकर एक मोबाइल ऐप्प तैयार किया जिसका नाम रखा गया बुल्ली बाई।

मुम्बई पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम का मामला बना कर दोनो को अरेस्ट किया और मामला खुला।  इस ऐप में मुस्लिम समाज की लगभग 100 प्रसिद्ध महिलाओं के फोटो को तोड़मरोड़ का डाला गया था और उनके बारे में उल्टा सीधा लिखा गया था। मामला सीधा सीधा हेट क्राइम से जुड़ा हुआ है जिसके लिए भारत के संविधान में प्रदत्त प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गयी है।

युवाओं में जल्दी अमीर होने के लिए किसी भी हद तक जाने की प्रवृत्ति खतरनाक हो गयी है। सोशल मीडिया में अक्सर स्टोरीज चलाई जाती हैं कि अमुक व्यक्ति एक आईडिया की वजह से रातों रात अमीर हो गया। नफ़रत का बाजार भी कोई नया नही है। इन्टरनेट का जमाना आने से पूर्व यह संगठित तरीके से अखबारों और पत्रिकाओं में लेख छाप कर और इतिहास की किताबों में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करके किया जाता रहा है।

मेरा मत

देश दुनिया में कई मत ऐसे हैं जो दूसरे अन्य मत विश्वास रखने वालों के समूल सफाए की बातें खुल कर करते आये हैं । हिन्दू समाज के युवक युवतियों में इस तरह की नफरत पनपना चिंता का विषय है मुझे ऐसे लगता है कि कानून और प्रशासन की लगातार विफलता और उदासीनता के कारण देश समाज में कुछ लोग राजनीतिक लक्ष्यों की पूर्ती के लिए नफरत का संगठित उद्योग चला रहे हैं और अपने देश धर्म और सांस्कृतिक विरासत से अनजान युवा पीढ़ी नफरत में से रोजगार तलाश रही है।

निम्न और मध्यम आर्थिक वर्ग के परिवारों के बालक बालिकाएं जब किसी कानूनी पचड़े में उलझ जाते हैं तो पूरा परिवार नष्ट होने के कगार पर पहुँच जाता है। हमारे सनातन धर्म में महिलाओं का विशेष रूप से सम्मान किया जाता है और वो महिलाएं किसी भी धर्म कौम जात की हों उनके उपर अभद्र टिप्पणी करना या उनके अपमान की कल्पना करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नही है।

मैं पुलिस को भी बराबर का दोषी मानता हूँ क्यूंकि मैंने कभी भी किसी भी ऑनलाइन मंच पर पुलिस की जागरूकता बढाने बाबत कोई पहल कभी देखी नही है, पुलिस के वेरीफाईड सोशल मीडिया हैंडल्स के द्वारा गलत कमेन्ट करने वाले और गंदा लिखने वाले लोगों को तीन बार वार्निंग देने का सिस्टम होना चाहिये ताकि समाज में पुलिस की सहभागिता बढ़े और कानून का डर लोगों के मन में रहे। एक तरफ जहाँ कुछ लोग जो मन में आये लिखते रहते हैं और नफरत का जहर बोते रहते हैं उन्हें देख देख कर सभी का मन करता है कि जब उसे कुछ नही हो रहा तो मैं भी तो कुछ भी करने को स्वतंत्र हूँ ।

Conclusion

युवाओं को एक बात समझनी चाहिए कि राजनीतिक कार्यकर्ता और कार्यकुत्ते में बहुत फर्क होता है। मौजूदा हालातों में राजनीतिक पार्टियों को कार्यकर्ताओं की बजाए कार्यकुत्ते ज्यादा सूट कर रहे हैं इसीलिए किसी भी नेता या पार्टी का कार्यकुत्ता बनने की राह पर ना चलें । अच्छी और बुरी राह की पहचान बेहद सरल होती है जिस राह पर आते जाते हुए लोग ठीक मिल जाएँ वही राह अच्छी होती है और जीवन में यदि डेली रूटीन में गलत लोग मिलने लग जाएँ तो समझ जाना चाहिए कि हम गलत राह पर चढ़ चुके हैं और अब हमें वापिस आने की आवश्यकता है।

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