खून चेक लैबोरेटरी<-+->फ़ूड चेक लैबोरेटरी

दूध में फोर्मेलिन की उपस्थिति दिखाता मिल्क टेस्ट (फोर्मलिन मुर्दाघरों में डेडबॉडी को सड़ने से बचने में प्रयोग किया जाने वाला यौगिक है, इसकी एक बूँद दूध के पूरे ड्रम को सुरक्षित रखती है, मार्च से लेकर नवंबर तक लगभग टेस्ट पोजिटिव ही आ जाते हैं )

साथियों नमस्कार,

आये दिन हमें अपना खून का सैंपल देने के लिए लेबोरेटरी में जाना पड़ता है। व्यवस्था ने आपकी हमारी सुविधा के लिए मोहल्ले में कोने कोने में लेबोरेटरी खुलवा रखी है। जहाँ हमारा खून निकाल कर अनेक पैरामीटर जैसे ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल , यूरिक एसिड आदि आदि चेक करके बताया जाता है और पैंतालीस पचास की उम्र तक पहुँचते पहुँचते हम अपनी रिपोर्ट्स को डॉक्टर्स से डिस्कस करते करते खुद अच्छे खासे डॉक्टर बन चुके होते हैं।

बाजारवाद की सर्विस इतनी तेज है कि आपको सैंपल देने के लिए भी कोई कष्ट ना उठाना पड़े इसके लिए आपके घर से सैंपल कलेक्ट करने का तंत्र भी विकसित हो गया है। इसी दिशा में अब नया कदम यह आने वाला है के एक आई.ओ.टी. इनेबल्ड टैग व्यक्ति की बॉडी में फिक्स किया जाएगा जो सारा डाटा इन्टरनेट के माद्यम से मेडिकल सिस्टम में पहुंचाएगा। इसमें बिल हमारा ही आयेगा और उनकी दूकान चमकेगी।

यह तो सभी अच्छे से जानते हैं कि हम जैसा भोजन करते हैं हमारा शरीर उसी भोजन से ही बनता है और आज के समय में जो भोजन हमारे घरों में आ रहा है उसके बारे में हमारी जानकारी बस उसपर लगे लेबल तक ही सीमित है और जो लेबल पर लिखा रहता है उसके बारे में समझने में हर किसी को महारत हासिल नही है।

यदि हम जरा भी फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की जानकारी रखते हैं तो हमें यह बात समझ में होती है कि फ़ूड इंडस्ट्री का सबसे बड़ा चैलेंज प्रोसेस्ड फ़ूड को अधिक से अधिक समय तक शेल्फ पर पड़े रह सकने के काबिल बनाना होता है उसके लिए उसे उसमें प्रेजेर्वेटिवस मिलाने होते हैं।

उसके अलावा उसका दूसरा चैलेन्ज होता है प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग कास्ट कम से कम रखी जाए उसके लिए जितने अधिक सस्ते इनग्रेडीएंट्स मिल सकें उतना ही अच्छा है।

क्या आपने कभी यह सोचा है कि खून चेक करवाने की लेबोरेटरी जब मोहल्ले में कोने कोने में उपलब्ध है तो फ़ूड चेक करवाने की लेबोरेटरी कहाँ है हमें कैसे पता चलेगा कि हम जो भोजन कंज्यूम कर रहे हैं उसमें तो कोई गडबडझाला नही है।

हम यदि हिम्मत मार भी लें और बड़ी जद्दोजेहद के बाद किसी लेबोरेटरी में अपना फ़ूड सैंपल ले भी जाएँ तो आप यदि वहां कहेंगे के इसमें प्योरिटी की जांच कर दें आपको आगे से जवाब मिलेगा कि हम तो कानून द्वारा स्थापित स्टैण्डर्ड के अनुसार ही बतायेंगे यहाँ आ कर बात आपके हाथ से निकल जाएगी क्यूंकि आप कभी मान ही नही पाएंगे कि स्टैण्डर्ड ही मिलावट खोरों के पक्ष में बनाये गये हैं। इस लिंक पर फेसबुक पोस्ट में एक विडियो है जिसमें खुल्लम खुल्ला मिल्क इंडस्ट्री का बादशाह कह रहा है कि दूध का कारोबार करने के लिए गाय भैंसों की कोई आवश्यकता नही है।

कौन है वो और कैसी है उसकी सोच जो यह चाहता है कि फ़ूडचेक करने की कोई लेबोरेटरी देश में ना पनप पाए ऐसा क्या है। जो एक छोटा सा काम हमारा देश नही कर पा रहा है और हम बेधडक और निश्चिंत होकर दिन में तीन बार जो भी उपलब्ध है उसे खाए जा रहे हैं और नतीजा भी हमारे सामने है।

कोई डॉक्टर कभी नही कहता है कि भाई आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है अपना दूध चेक करवाओ उसमें तो यूरिया नही आ रहा है वो सीधा आपको अपनी प्रेस्क्रिप्शन लिखेगा आप उधर से यूरिया युक्त दूध पीते रहोगे और उधर से दवाई खाते रहोगे फिर एक दिन पटाका बोल जाएगा जैसे हर रोज हमारे चारों तरफ घटित हो रहा है और हम मूक दर्शक बने देख रहे हैं।

कर कोई कुछ नही सकता है क्यूंकि व्यवस्था ने शिकंजा इतना टाईट कसा है। उधर किसान को वैचारिक रूप से मारने के लिए उसके दिमाग की नसें काट दी हैं और वो बेहोशी में जिस बोतल पर जहर लिखा हुआ है उसे दवाई बोल बोल कर दिनरात डाल रहे हैं और इधर से उपभोक्ताओं में समझ विकसित न हो पाए उन्हें कन्फ्यूज करके रख दिया है। किसी को यदि समझ में अभी आ जाए तो ऑप्शन उसके पास भी नही है क्यूंकि वो जायेगा कहाँ कोई जगह ही नही है और कोई ऑप्शन भी नही है।

सेफ फ़ूड नेटवर्क के मार्फ़त हम इन्ही बातों पर चिंतन चर्चा और विमर्श को शुरू करके एक ऐसा पोटेंशियल ग्रेडिएंट बनाना चाहतें हैं जो अपने मुताबिक फ़ूड की उपलब्धता सुनिश्चित कराए जाने के लिए माहौल भी बनाये और सुविधाएँ भी क्रिएट करे

सेफ फ़ूड नेटवर्क के मार्फ़त हम इन्ही बातों पर चिंतन चर्चा और विमर्श को शुरू करके एक ऐसा पोटेंशियल ग्रेडिएंट बनाना चाहतें हैं जो अपने मुताबिक फ़ूड की उपलब्धता सुनिश्चित कराए जाने के लिए माहौल भी बनाये और सुविधाएँ भी क्रिएट करे ।

एक बात हमें अवश्य मन में रखनी चाहिए कि पृथ्वी आकाश और पातळ में मौजूद हरेक जीव का पहला काम अपने लिए और अपने परिवार के लिए साफ़ सुथरे और सुरक्षित भोजन की व्यवस्था करना है और इसके लिए पीढ़ी दर पीढ़ी समझ को अपनी आने वाली पीढ़ी को ट्रांसफर करना होता है और यह काम हमने बिलकुल छोड़ कर अपने भोजन की व्यवस्था को आउटसोर्स कर दिया है

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