किसान प्रोड्यूसर कम्पनी का संचालन कैसे करना होता है?

कैसे बनी है आपकी किसान कम्पनी

शौक शौक में किसान प्रोड्यूसर कंपनी बनाने वाले किसानों की आज कोई कमी नहीं है। कुछ लोग सोचते हैं कि चलों सरकारी विभाग वाले कम्पनी बनवा रहे हैं इसी बहाने घर की कम्पनी हो जाएगी। सरकार कुछ न कुछ देगी ही हमारा क्या जा रहा है। किसान कम्पनी बना कर खड़ी करने की वस्तु नही है क्योंकि ये खड़े खड़े किसानों को आर्थिक चोट मार सकती है। कंपनी का गठन चलाने दौड़ाने और आर्थिक उड़ान लेने के लिए ही किया जाता है। किसान प्रोड्यूसर कम्पनी एक फाइनेंसियल इंस्ट्रूमेंट है जिसका उपयोग कारोबार करके धन कमाने में किया जाता है | 

प्रोग्रोवेर्स प्रोड्यूसर्स कम्पनी तरावडी करनाल हरियाणा भारत के चेयरमैन श्री राजेश भाटिया और निदेशक विकास चौधरी और अन्य सदस्यगण बैठक करते हुए

किसान कम्पनी की टीम

किसान कम्पनी चलाना एक टीम वर्क है जिसमें निमिन्लिखित टीम मेम्बेर्स होते हैं :किसान ( डायरेक्टर्स और प्रमोटर्स के रूप में, यही कंपनी के असली मालिक होते हैं )

सीईओ (कर्मचारी की भूमिका में जो बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के आदेशों का अनुपालन करता है) 

कंपनी सेक्रेटरी ( सरकार यानि रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के साथ निरंतर संवाद करने के लिए, इसे बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर नियुक्त करते हैं )     

चार्टेड अकाउंटेंट ( ऑडिटर की भूमिका में, इसे बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर नियुक्त करते हैं) 

इस टीम के बिना कोई कम्पनी नहीं चलती है , किसान कम्पनी शुरू करने से पुर्व इस टीम का बनाया जाना सबसे महत्वपूर्ण काम होता है | 

प्रस्तुत लेख के  माध्यम से यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि किसान कम्पनी का गठन होते ही  कौन कौन से काम करने जरूरी होते हैं और किसान कंपनी का सञ्चालन टीम बना कर कैसे किया जा सकता है और किसान प्रोड्यूसर कम्पनी के माध्यम से सफलता अर्जित की जा सकती है | 

किसान कम्पनी के गठन के बाद जरूरी काम

  1. जैसे ही किसान कम्पनी का पंजीकरण होता है तो किसानों को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से एक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है जिसमें CIN (कॉर्पोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर), कंपनी का नाम, पंजीकरण की तारीख और रजिस्टर्ड कार्यालय का पता लिखा होता है।
  2. आजकल कंपनी रजिस्ट्रेशन के साथ ही PAN कार्ड और TAN नम्बर अप्लाई हो जाते हैं जिससे किसानों की बड़ी मदद हो जाती है क्योंकि बिना PAN कार्ड के आजकल बैंक खाते नही खोलते हैं।
  3. किसान प्रोड्यूसर कंपनी पंजीकृत होते ही सबसे पहले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की पहली बैठक बुलवानी होती है जिसमे बैंक खाता खुलवाने का रेजोल्यूशन पास करना जरूरी होता है। रेजोल्यूशन पास करने के लिए हर बैंक का अपना एक फॉरमेट होता है जिसे पहले ही ले लेना चाहिए ।
  4. बैंक खाता खुलने के बाद सबसे पहला काम है किसान प्रोड्यूसर कंपनी के लिए कैपिटल एकत्र करना। सबसे पहले जिन 10 किसानों ने कंपनी गठन करने में अपनी भूमिका निभाई है उनको आपसी राय मशवरे से कंपनी के शेयर्स लेने चाहिए। कम्पनी में शेयर लेने का मतलब है कंपनी में हिस्सेदारी लेना जो केवल पैसे देकर ली जा सकती है। कोई किसान कम्पनी गठन में शामिल होकर कम्पनी में पैसे देकर शेयर नहीं लेते उनकी हालात बिल्कुल वैसी है जैसे किसी ने अपने बच्चे की सगाई कर दी लेकिन उसकी शादी नहीं की। मतलब उसका पिंडा सिवाए बेइज्जती और नुकसान से नही छूटेगा कम्पनी से।
  5. बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की पहली बैठक में कम्पनी के चालू वित्त वर्ष के लिए ऑडिटर की नियुक्ति करनी जरूरी होती है इसके लिए एक रेजोल्यूशन भी पास करना जरूरी होता है | ऑडिटर की नियुक्ति करने के लिए कंपनी सेक्रेट्री के पास जा कर ADT-1 फार्म भरना पड़ता है जिसे कम्पनी सेक्रेटरी रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज को भेजना पड़ता है | नियुक्ति हो जाने पर एक चालान (रसीद) ऑनलाइन जेनरेट होती है उसे अपने रिकॉर्ड में संभाल कर रखना पड़ता है |  
  6. किसान कम्पनी को करंट एकाउंट खोलना चाहिए , जो भी बैंक ब्रांच किसान कंपनी कार्यालय के निकट हो वहां खाता खोल लेना चाहिए या फिर जिस बैंक में अच्छे ताल्लुकात हों वहां खाता खोल लेना चाहिए।
  7. पंजीकरण के बाद चार्टेड अकाउंटेंट एक छोटी सी किताब नुमा डॉक्यूमेंट देता है जिसे मेमेओरंडम ऑफ एसोसिएशन कहते हैं इसके अंदर किसान प्रोड्यूसर कम्पनी बनाये जाने के उद्देश्य और कम्पनी को चलाने के नियम कानून और उनके कायदे लिखे होते हैं।
  8. जो फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनीज 2 नवम्बर 2018 के बाद बनी हैं उन्हें बैंक खाता खुलने के बाद अपना कारोबार शुरू करने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज से कोम्मेंस्मेंट ऑफ़ बिजनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना आवश्यक है अन्यथा रजिस्ट्रार कंपनी का पंजीकरण रद्द भी कर सकता है और जुर्माना भी लगा सकता है | इस सर्टिफिकेट को लेने के लिए कंपनी सेक्रेटरी या चार्टेड अकाउंटेंट के कार्यालय से आवेदन किया जाता है |   
  9. कम्पनी संचालन के कायदों की पूरी जान इसी मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के अंदर मौजूद आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन नामक चैप्टर में लिखे होते हैं। इसीलिए किसी थोड़े घणे सयाने आदमी को बीच मे लेकर इसे अच्छे से पढ़ समझ लेना चाहिए। जितनी बार पढोगे उतना अच्छा है और हरबार नई नई बातें आपकी पकड़ में आएंगी। जिससे आपका कॉन्फिडेन्स बढ़ेगा।
  10. कंपनी बनते ही सबसे पहले एक बस्ता बनाना लाजिमी होता है जिसे रजिस्टर्ड कार्यालय में रखा जाना चाहिए इस बस्ते में कंपनी से जुड़े सभी कागज़ात, जैसे मेमेओरंडम ऑफ एसोसिएशन, लेटर हेड्स, मुहर, कम्पनी सील (गोल मुहर), हाजिरी रजिस्टर, रेजोल्यूशन रजिस्टर, शेयर होल्डर रेजिटर आदि रखे जाने होते हैं।
  11. किसान प्रोड्यूसर कम्पनी के पंजीकृत होने के 90 दिनों के अंदर अंदर AGM (एनुअल जनरल मीटिंग ) करनी आवश्यक होती है इसके अंदर सभी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किये जाते हैं (इसको आयोजित करने की प्रक्रिया पर एक अलग से लेख लिख कर प्रकाश डालूँगा ),  इस  बैठक में डायरेक्टर्स को बदला जा सकता है कोई नया आना चाहे या कोई छोड़ कर जाना चाहे तो यह एक महत्वपूर्ण अवसर होता है | इस बैठक का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है | 
  12. यदि डायरेक्टर्स में कोई बदलाव होता है तो बैठक(AGM) के बाद कंपनी सेक्रेट्री के कार्यालय में जा कर पूरी कारवाई करवानी पड़ती है जिसे रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज की वेबसाइट में जा कर अपडेट करना  आवश्यक होता है | पूरी प्रक्रिया सही तरीके से हो जाने के बाद चालान और अन्य डाक्यूमेंट्स डाउनलोड होते हैं जिन्हें कंपनी के रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना पड़ता है | 

एनुअल रिटर्न्स के बारे में कुछ महतवपूर्ण जानकारियाँ 

  • जो कंपनियां 31 दिसम्बर 2017 को या उससे पहले बनी हैं उनका फाइनेंसियल ईयर 31 मार्च 2018 को खतम हो चुका है और उन्होंने 30 सितम्बर 2018 तक अपनी एनुअल रिटर्न्स रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के कार्यालय में कंपनी सेक्रेटरी या चार्टेड अकाउंटेंट के माध्यम से जमा करवानी थी | 
  • जो कम्पनियां 1 जनवरी 2018 को या उसके बाद बनी हैं उनका फाइनेंसियल ईयर 31 मार्च 2019 को खतम हुआ है और उन्होंने तक अपनी कम्पनी की एनुअल रिटर्न्स रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के कार्यालय में कंपनी सेक्रेटरी या चार्टेड अकाउंटेंट के माध्यम से 30 सिताम्बर 2019 तक जमा करवानी है | उससे पहले उन्हें 31 मार्च 2019 तक के अपने खातों में हुए लेन देन का ऑडिट करवाना पड़ेगा और ऑडिटेड बैलेंस शीट के आधार पर इनकम टैक्स रिटर्न भरनी पड़ेगी और AGM (एनुअल जनरल मीटिंग यानी शेयर होल्डर की वार्षिक बैठक) भी आयोजित करवानी होगी | 
  • एनुअल रिटर्न के लिए निम्नलिखित तीन डाक्यूमेंट्स की आवश्कता होती है :

                लिस्ट ऑफ़ शेयर होल्डर्स 

                शेयर्स में हुए लेन देन की लिस्ट 

                ऑडिटेड बैलेंस शीट 

  • एनुअल रिटर्न से पूर्व सभी डायरेक्टर्स का KYC एक दम फिट होना चाहिए क्यूंकि यदि कुछ भी कमी पेशी होगी तो एनुअल रिटर्न  फाइल ही नही होगी , मामला अटक सा जाएगा |

नोट : इस विषय में यदि आपको कोई सलाह  करनी हो तो कृपया 9992220655 पर सोमवार से शुक्रवार सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे के बीच में कर लें 

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