बहुत याद आते हैं सरदार हरविन्द्र सिंघ आत्मा जी

harvinder singh atma

एक साल से भी ज्यादा समय बीत गया पिछले साल सितम्बर महीने की एक उदास सी शाम को जब मैं नारायणगढ़ से लौट रहा था तो अचानक से व्हाट्सएप्प पर एक संदेश प्राप्त हुआ जो सीनियर साथी श्री हरविंद्र सिंह आत्मा जी Harvinder Singh Atma के बारे में था। संदेश का ले आउट देख कर ही झटका लग गया और बड़े ही बोझिल मन से पढ़ा गया। आँखों के सामने अँधेरा था और दिमाग सुन्न। दो साल पहले ही नाबार्ड …

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पुणे के राहुल पाठक बना रहे हैं बिना बिजली के चलने वाला पोर्टेबल वाटर फ़िल्टर

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पोर्टेबल वाटर फ़िल्टर बनाने वाले ये श्रीमान राहिल पाठक जी हैं जो पुणे, महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। राहुल बताते हैं कि जब पुणे में मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, तब मुझे समझ आया कि तार्किक ढंग से प्रयोग के जरिये ही मैं अनेकों समस्याओं का हल निकाल सकता हूँ जिससे मैं अपने भविष्य का निर्माण करने के साथ साथ अनेकों लोगों का जीवन भी आसान कर सकता हूँ। साल 1993 में मैंने अपनी पढ़ाई बीच में ही …

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दमा के रोगी ध्यान दें काइंडली प्लीज

नमस्कार , मेरे एक अजीज सीनियर साथी हैं श्रीमान वैधराज पुष्कर वीर सिंह भाटिया जी, जो हर वर्ष अपने आयुर्वेदिक प्रतिष्ठान धर्मायु आयुर्वेद डेराबस्सी पंजाब भारत से वर्ष में एक बार शरद पूर्णिमा को सेवन की जाने वाली दमे की अचूक दवा जिसके सेवन से व्यक्ति एकबार में ही दमे के रोग से मुक्त हो जाता है का वितरण करेंगे। दवा को हर वर्ष पहले से ही प्राचीन शास्त्रीय विधियों के द्वारा उच्च गुणवत्ता के मानकों की कसौटी पर रसशाला …

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धौले एंड काले कानून और किसानपुत्र की व्यथा का व्यावाहरिक पक्ष ग्रामीण भारत की तकलीफ

मेरे एक अजीज साथी हैं सांगवान साहब जिनसे मेरा परिचय फेसबुक के माध्यम से हुआ था और मुझे उनका स्वभाव और विचार ठीक लगे और मेरी उनसे कब दोस्ती हुई और पारिवारिक भाईचारे में बदल गयी पता ही नही चला। मेरे पास वो कई बार चंडीगढ़ आये और मुलाकातें होती रही और मुझे उनकी अपने भविष्य को बनाने सम्बंधित आकांक्षाओं और योजनाओं का पता चलता रहा। बीच बीच में कई बार मेरी उनसे चर्चा बिजनेस सेटअप को लेकर हो जाया …

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बूढी मां के तीन गहने

उन्नीसवीं शताब्दी का अंतिम समय था। ठाकुरदास नामक एक वयोवृद्ध कोलकता में रहता था। उसके परिवार में केवल एक बच्चा और पत्नी थी। इस सीमित परिवार का भरण-पोषण भी ठीक प्रकार से न हो पाता। नियति ने उन्हें मेदिनीपुर जिले के एक गाँव में ला पटका। वहाँ ठाकुरदास को दो रुपये महावार की नौकरी मिली। कालाँतर में उनका देहाँत हो गया। पत्नी के कंधों पर सारे परिवार का दायित्व आया। इसी तरह कई वर्ष बीत गए। एक दिन रात के …

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हल्दीघाटी युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने वाले प्रमुख मेवाड़ी योद्धा

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को मेवाड़ के महाराणा प्रताप का समर्थन करने वाले घुड़सवारों और धनुर्धारियों और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच लडा गया था हल्दीघाटी का युद्ध 1) ग्वालियर के राजा रामशाह तोमर 2) कुंवर शालिवाहन तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र व महाराणा प्रताप के बहनोई) 3) कुंवर भान तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र) 4) कुंवर प्रताप तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र) 5) भंवर धर्मागत तोमर (शालिवाहन तोमर के पुत्र) 6) दुर्गा तोमर (रामशाह तोमर …

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मिट्टी के जानकार बाबा दीपक सचदे

बाबा दीपक सचदे जी आज इस भौतिक जगत में नही हैं, लेकिन उनके द्वारा स्थापित काम जगत में बोल रहा है। बाबा दीपक सचदे के खेतों की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन कॉन्टेंट 6 से 7 तक है, यह ICAR के कृषि वैज्ञानिकों ने चेक करके बताया था। प्रकृति में जो मिट्टी निर्माण की प्रक्रिया है जो 400 वर्षों में पूरी होती है उसे बाबा दीपक सचदे ने समझ कर उसे सहज रूप से मात्र तीन महीने में पूर्ण कर लिया …

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समाज सेवा और सम्मान

नारायणगढ़ सिविल हॉस्पिटल में सुबह आठ बजे मेरे एक मित्र श्रीमान अजय वालिया जी दिखाने के लिए ओपीडी की लाइन में लगने लगे तो उसने देखा कि लाइन अभी लंबी है इधर पेट मे चूहे कूद रहे थे तो अपने से आगे वाले को बोल कर नज़दीक की दुकान से एक सैंडविच और पीने के लिए लस्सी का पाउच ले आये और लाइन की साइड में बैठ कर खाने लगे तभी उनका ध्यान एक आठ साल के बच्चे ने आकर्षित …

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आर्थिक संगठन का स्वरुप कैसा होगा और यह काम कैसे करेगा

आर्थिक संगठन की आत्मा होती है : पूँजी यानि की कैपिटल जो आज हर किसी के पास नही होती है, पूँजी की मदद से ही सभी व्यापारिक गतिविधियाँ चलाई जा सकती है। पूँजी को हाथ में कैश के रूप में नही रखा जा सकता है। इसके लिए एक बैंक खाते की आवश्यकता होती है और वो भी करंट अकाउंट होना चाहिए क्यूंकि हमें ऐसा बैंक खाता चाहिए होता है जिसमें जितनी बार मर्जी लेन देन किया जा सके। बचत खाता …

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शुभ लाभ आर्थिक संगठन

भूमिका हमारा देश असल में एक दुनिया हैं यहाँ आदिकाल से ही पूरे विश्व से शोधार्थी आते रहे हैं और यहाँ से सीख सीख कर ज्ञान और अनुभव पूरी दुनिया में ले जाते रहे हैं। शोधार्थियों के शोध ग्रंथों को पढ़ कर और उनके अनुभवों को सुन कर यहाँ की धन संपदा और वैभव को लूटने के मकसद से यहाँ हमलावर भी आते रहे हैं जिन्होंने हमारी धन संपदा को लूटने के साथ साथ हमारे ज्ञान केन्द्रों जैसे नालंदा और …

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