महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय राजमार्गों पर एक वर्ष में एक से अधिक दुर्घटनाओं वाले हिस्सों पर ठेकेदारों को दंड का प्रावधान किया गया है।
- (BOT Model) के अंतर्गत बनने वाली सड़कों पर दुर्घटना रोकने की जिम्मेदारी ठेकेदारों को सौंपी गई है।
- देशभर में 3,500 से अधिक दुर्घटना बहुल क्षेत्र (Black Spots) पहचाने गए हैं।
- सड़क डिजाइन और इंजीनियरिंग की खामियां दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बताई गई हैं।
- भारत में वाहनों की संख्या कम होने के बावजूद मार्ग दुर्घटनाओं और मृत्यु दर विश्व में सबसे अधिक है।
देश में सड़क सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा निरंतर चिंता का विषय रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर हो रहीं बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत (Build-Operate-Transfer) यानी (BOT Model) पर बनने वाली सड़कों पर दुर्घटनाएं रोकने की जिम्मेदारी निर्माण करने वाले ठेकेदारों पर होगी। यदि किसी विशेष खंड पर एक वर्ष में एक से अधिक दुर्घटना होती है, तो ठेकेदार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दुर्घटना बहुल क्षेत्रों की बढ़ती संख्या
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 3,500 से अधिक ऐसे स्थान पाए गए हैं, जहां दुर्घटनाएं बार-बार घटित होती हैं। प्रश्न यह है कि इतने अधिक ‘ब्लैक स्पॉट’ हमारे राजमार्गों पर क्यों मौजूद हैं? पहले भी इन्हें ठीक करने के लिए अभियान चलाए गए, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं आए।
इसके पीछे एक प्रमुख कारण सड़क डिजाइन और इंजीनियरिंग की खामियां मानी जाती हैं। जब सड़क निर्माण के समय ढलान, चौड़ाई, मोड़ों की संरचना और संकेतक (Signage) पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता, तो वही स्थान भविष्य में दुर्घटना उत्पन्न क्षेत्रों में बदल जाते हैं।
ठेकेदारों की जवाबदेही किस प्रकार तय होगी?
नई व्यवस्था में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि दुर्घटना की जिम्मेदारी कैसे निर्धारित की जाएगी। कई बार दुर्घटनाओं के पीछे वाहन चालकों की लापरवाही और वाहन की तकनीकी खराबी जैसे कारण भी होते हैं। यदि ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसे तर्क देने लगें तो यह पहल प्रभावी नहीं हो पाएगी।
साथ ही, बीओटी मॉडल के अलावा अन्य प्रकार के सड़क निर्माण प्रोजेक्ट भी होते हैं। उन पर दुर्घटनाओं की रोकथाम की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह प्रश्न भी विचार योग्य है।
देश में सड़क तेज, लेकिन सुरक्षा धीमी
जैसे जैसे राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और फोर लेन मार्ग तेजी से बन रहे हैं, यातायात दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है। यह स्थिति तब है जब भारत में वाहनों की कुल संख्या विकसित देशों की तुलना में कम है। इसके बावजूद दुर्घटना और मृत्युदर विश्व में सबसे अधिक है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
समाधान की दिशा
- सही सड़क डिजाइन और इंजीनियरिंग पर अधिक ध्यान देना होगा।
- दुर्घटना बहुल क्षेत्रों के सुधार को प्राथमिकता देनी होगी।
- ठेकेदारों की जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था लागू करनी होगी।
- वाहन चालकों के लिए सुरक्षित ड्राइविंग प्रशिक्षण को बढ़ावा देना होगा।
यदि इन चरणों पर गंभीरता से काम किया जाए, तभी मार्ग दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक संभव है। यह केवल दंड की बात नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का प्रश्न है।