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साइबर गुलामी: आधुनिक मानव तस्करी का खतरनाक डिजिटल रूप

  • साइबर गुलामी आधुनिक मानव तस्करी का एक नया डिजिटल रूप है।
  • युवाओं को उच्च वेतन और बेहतर नौकरी के बहाने विदेश बुलाया जाता है।
  • वहां पहुंचने पर पासपोर्ट जब्त कर उन्हें ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी में लगाया जाता है।
  • म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और फिलीपींस में ऐसे साइबर अपराध केंद्र तेजी से बढ़े हैं।
  • म्यांमार के केके पार्क से हाल ही में 28 देशों के लगभग 1,500 लोग भागकर थाईलैंड पहुंचे।
  • इनमें लगभग 500 भारतीय थे जिनकी वापसी प्रक्रिया भारत सरकार द्वारा शुरू की गई।
  • मार्च 2025 में भारत ने सैन्य विमान से 549 नागरिकों को वापस लाया था।
  • धोखे से फंसाए गए युवाओं से फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर ऑनलाइन ठगी करवाई जाती थी।
  • काम से मना करने पर पीड़ितों को शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न सहना पड़ता था।
  • भारत ने इस समस्या से निपटने के लिए उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी पैनल का गठन किया है।

आज के डिजिटल दौर में गुलामी का विचार भले ही पुराना लगे, लेकिन तकनीक और इंटरनेट के विस्तार ने एक नई और भयावह वास्तविकता को जन्म दिया है जिसे साइबर गुलामी कहा जाता है। यह ऐसी अवैध गतिविधि है जिसमें युवाओं को आकर्षक (Job Offer), ऊंचे वेतन और विदेश में उज्जवल करियर के नाम पर फंसाया जाता है।

विदेश पहुंचते ही उनका (Passport) छीन लिया जाता है और उन्हें बंधन में रखकर ऑनलाइन ठगी (Online Scam), निवेश धोखाधड़ी (Investment Fraud) और रोमांस स्कैम (Romance Scam) जैसे अपराधों के लिए मजबूर किया जाता है।

कहां पनप रहा है साइबर गुलामी का नेटवर्क

हाल के वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और फिलीपींस में ऐसे साइबर अपराध केंद्र तेजी से फैल रहे हैं। म्यांमार का केके पार्क इस अवैध नेटवर्क का प्रमुख अड्डा बन चुका है। यहां विदेशी युवाओं को कैद करके ऑनलाइन ठगी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हाल ही में, केके पार्क से लगभग 1,500 लोग भागकर थाईलैंड पहुंचे जिनमें लगभग 500 भारतीय नागरिक भी थे। भारत ने थाईलैंड सरकार के साथ मिलकर नागरिकता जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का काम शुरू किया है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि विशेष विमान की मदद से सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाएगी।

मार्च 2025 में भी भारत ने सैन्य विमान के जरिए 549 लोगों को म्यांमार-थाई सीमा से बचाकर वापस लाया था।

कैसे फंसाए जाते हैं युवा

मुक्त हुए पीड़ितों के अनुसार, उन्हें (Customer Support) या (Technical Support) जैसी नौकरी का वादा करके बुलाया गया। वहां पहुंचने पर उनके दस्तावेज जब्त कर लिए गए और उन्हें नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया।

मना करने पर मिलने वाली सजा

  • मारपीट
  • भोजन से वंचित करना
  • मानसिक उत्पीड़न
  • लगातार कार्य दवाब

सरकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रयास

भारत सरकार ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय ने नकली पहचान पर लिए गए मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करने और अंतरराष्ट्रीय कॉल स्पूफिंग को रोकने के लिए निर्देश जारी किए हैं।

इस समस्या का नेटवर्क बहु-देशीय है। पीड़ितों की भर्ती एक देश में होती है, उन्हें कैद दूसरे देश में किया जाता है और ठगी किसी तीसरे देश के नागरिकों से की जाती है। इसलिए, इस अपराध से मुकाबला करने के लिए देशों को संयुक्त रणनीति अपनानी होगी।

कैसे बचें साइबर गुलामी के जाल से

  • किसी भी नौकरी के ऑफर को स्वीकार करने से पहले कंपनी की पृष्ठभूमि जांच करें।
  • वीजा प्रक्रिया और अनुबंध शर्तों को समझें।
  • अत्यधिक आकर्षक वेतन प्रस्तावों से सावधान रहें।
  • विदेश जाने से पहले परिवार और सरकारी पोर्टल से जानकारी सत्यापित करें।
  • हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें।

यदि समय रहते इस जाल को नहीं तोड़ा गया तो आने वाले समय में यह डिजिटल युग की सबसे भयावह मानव त्रासदियों में बदल सकता है।