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डिजिटल अरेस्ट है क्या और सुप्रीम कोर्ट क्या कह रहा है ?

  • देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों में अब तक 3,000 करोड़ रुपए से अधिक की उगाही का अनुमान है ।
  • अपराधी ऑडियो या वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराने-धमकाने की रणनीति अपनाते हैं।
  • सीबीआई ने अदालत को बताया कि इन अपराधों का संचालन विदेशों से संचालित सिंडिकेट द्वारा किया जाता है।
  • हरियाणा की एक बुजुर्ग महिला से सितंबर में 1.05 करोड़ रुपए की ठगी, मामले का अदालत ने संज्ञान लिया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एक न्यायमित्र नियुक्त किया है।
  • अगली सुनवाई की तारीख 10 नवंबर 2025 तय की गई।
  • अन्य याचिकाओं के साथ ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी एप पर रोक की मांग वाली याचिका की भी सुनवाई होगी।

परिचय

देश में साइबर अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। इन्हीं उभरते अपराधों में एक है डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest), जिसमें जालसाज खुद को जांच एजेंसियों या सरकारी विभागों के अधिकारी बताकर नागरिकों को धमकाते हैं और आर्थिक शोषण करते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इन मामलों से कड़ाई से निपटने की बात कही।

डिजिटल अरेस्ट क्या है

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक ऐसा साइबर अपराध है, जिसमें जालसाज ऑडियो या वीडियो कॉल पर पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी अपराध की जांच में फंसा है। वे नकली पहचान प्रमाणित करने के लिए Fake Court Order, Investigation Notice या सरकारी आदेशों की नकल पेश करते हैं। पीड़ित को मानसिक रूप से दबाव में रखकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की पीठ ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि वरिष्ठ नागरिकों समेत पीड़ितों से 3,000 करोड़ रुपए से अधिक की उगाही हो चुकी है। अदालत ने कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो समस्या और बढ़ेगी।

जांच एजेंसियों को मजबूत करने की आवश्यकता

पीठ का मत था कि न्यायिक आदेशों के माध्यम से एजेंसियों को सशक्त करना आवश्यक है, ताकि इस तरह के साइबर अपराधों पर रोका जा सके। अदालत ने इस मामले में सरकार और सीबीआई की रिपोर्टों का अवलोकन किया है।

ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी से जुड़े मुद्दे

इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने उन ऑनलाइन Betting Platforms और Online Gambling Applications पर भी चर्चा की, जो ‘सोशल गेमिंग’ या ‘ई-स्पोर्ट्स’ के नाम पर संचालित किए जा रहे हैं। एक अन्य याचिका में इन प्लेटफार्मों पर रोक लगाने की मांग की गई है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस पर विस्तृत जवाब मांगा है।

विदेशों से संचालित साइबर सिंडिकेट

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कई बड़े साइबर ठगी नेटवर्क विदेशों से संचालित होते हैं। इन सिंडिकेट्स के पास वित्तीय तकनीकी साधन और प्रशिक्षित मानव संसाधन का पूरा ढांचा होता है, जिससे वे बड़े स्तर पर ठगी अभियान चलाते हैं।

वरिष्ठ नागरिकों पर बढ़ता खतरा

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ऐसे मामलों में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक शिकार बन रहे हैं। मानसिक दबाव और भय दिखाकर उनसे बड़ी राशियों की उगाही की जाती है। हरियाणा की एक महिला द्वारा अदालत को लिखे पत्र के आधार पर एक गंभीर मामला दर्ज किया गया है, जिसमें उनसे 1.05 करोड़ रुपए ले लिए गए।

निष्कर्ष

यह स्पष्ट है कि डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) न केवल व्यक्तिगत आर्थिक सुरक्षा बल्कि सामाजिक भरोसे पर भी प्रहार कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से उम्मीद है कि जांच व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाएगा, ताकि नागरिकों को इस प्रकार के साइबर जाल से बचाया जा सके।