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स्वधर्म परधर्म कहानी: कर्तव्य पालन की सच्ची सीख

स्वधर्म परधर्म कहानी: कर्तव्य पालन की सच्ची सीख

हर व्यक्ति और प्राणी का अपना एक विशेष कार्य होता है, और वह कार्य ही उसका स्वधर्म कहलाता है।

एक धोबी के घर में एक गधा और एक कुत्ता रहता था। दोनों अपने-अपने काम में मालिक की सहायता करते थे। गधा रोज भारी सामान ढोता और कुत्ता घर की रखवाली का काम करता था। कुछ समय बाद कुत्ते के मन में यह भावना आने लगी कि मालिक उसे भोजन कम देता है जबकि गधे को अधिक मिलता है। इस कारण कुत्ता भीतर ही भीतर नाराज रहने लगा।

एक रात घर में चोर घुस आए। कुत्ते ने उन्हें आते देखा, लेकिन अपनी नाराज़गी में वह चुप बैठा रहा। उसने सोचा कि मालिक को नुकसान हो जाने दो, क्योंकि उसने मुझे महत्व नहीं दिया। वहीं, गधे ने यह स्थिति समझ ली। उसने तुरंत यह जाना कि घर पर संकट है और किसी न किसी को मालिक को जगाना चाहिए।

गधे ने जोर-जोर से रेंकना शुरू किया। उसकी आवाज सुनकर मालिक की नींद खुल गई। मगर मालिक यह समझ ही नहीं पाया कि गधा ऐसा क्यों कर रहा है। उसे लगा कि गधा बेवजह शोर मचा रहा है। गुस्से में उसने गधे को बुरी तरह पीटा और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया।

इतने में चोर भागने लगे। उन्हें रोकने के लिए मालिक ने कुत्ते का सहारा लेना चाहा, पर अब कुत्ता भी डर चुका था। मालिक ने गुस्से में कुत्ते को भी पीटा। अब दोनों जमीन पर पड़े थे। एक को अपने स्वधर्म पर दृढ़ रहने की सजा मिली और दूसरे को परधर्म छोड़कर गलत राह पर चलने की।

सीख (Moral)

कहानी स्पष्ट संदेश देती है कि:

  • हर जीव का अपना एक कर्तव्य होता है।
  • यदि हम उस कर्तव्य (Duty) से भटकते हैं तो परिणाम दुखद होते हैं।
  • दूसरों के कार्य को अपनाना या ईर्ष्या करना गलत है।

अतः जीवन में स्वधर्म का पालन ही सही मार्ग है। जो कार्य हमें सौंपा गया है, उसे निष्ठा, ईमानदारी और शांत मन से पूरा करना ही सच्ची सफलता है।