महत्वपूर्ण तथ्य
- दीपिन्दर गोयल पंजाब के मुक्तसर में पले-बढ़े।
- उनके पिता हरबंस लाल गोयल जीवविज्ञान शिक्षक और माँ कौशल्या अंग्रेज़ी शिक्षिका थीं।
- बचपन में दीपिन्दर हकलाते थे और उन्हें अक्सर तुलना और तानों का सामना करना पड़ता था।
- उनको बिना पहचाने गए Asperger’s Syndrome का प्रभाव भी था।
- एक शिक्षक द्वारा परीक्षा में मदद मिलने के बाद उन्होंने केंद्रित मेहनत का महत्व समझा।
- एनटीएसई कैंप में उनकी मुलाकात अलबिंदर धिन्डसा से हुई, दोनों ने मिलकर IIT की तैयारी की।
- IIT दिल्ली से पढ़ाई के दौरान उन्होंने छोटी वेब परियोजनाओं पर काम किया।
- Bain & Company में काम करते हुए उन्होंने Foodlet.in (बाद में Foodiebay.com) की शुरुआत की।
- 2009 तक Foodiebay तीन शहरों में फैल चुका था।
- Info Edge के संजीव बिकचंदानी ने इसमें $1 मिलियन निवेश किया और नाम Zomato हो गया।
- Hyperpure, Blinkit और District के साथ कंपनी ने खाद्य सेवा से आगे विकास किया।
- 2025 में Zomato Ltd का नाम बदलकर Eternal Ltd कर दिया गया और यह BSE Sensex में शामिल हुआ।
दीपिन्दर गोयल ज़ोमैटो कहानी: संघर्ष, अनुशासन और Eternal विज़न
भारतीय उद्यमिता की दुनिया में दीपिन्दर गोयल का नाम उन लोगों में शामिल है जिन्होंने चुनौतियों को अपने विकास का आधार बनाया। पंजाब के एक छोटे से ग्रामीण परिवेश में प्रारंभ हुई उनकी कहानी केवल व्यवसाय की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर सीखने की है।
शुरुआती जीवन और परिवार
दीपिन्दर का बचपन मुक्तसर में बीता, जहां उनके पिता हरबंस लाल गोयल जीवविज्ञान के शिक्षक और माँ कौशल्या अंग्रेजी पढ़ाती थीं। परिवार सादगी में विश्वास करता था और घर में शिक्षा को सबसे बड़ा मूल्य माना जाता था। वही वातावरण दीपिन्दर की सोच की नींव बना।
आंतरिक संघर्ष और आत्मविश्वास की लड़ाई
बचपन में वे हकलाते थे। उन्हें अक्सर उनके रूप और स्वभाव को लेकर चिढ़ाया जाता था। बड़े भाई से लगातार तुलना ने उनमें स्वयं को साबित करने की तीव्र इच्छा जगाई। उनके व्यक्तित्व पर (Asperger’s Syndrome) का प्रभाव था, जिसके कारण वे दुनिया को अलग दृष्टि से देखते थे।
एक परीक्षा में शिक्षक की मदद से अचानक बेहतर रैंक आने पर उन्हें यह समझ आया कि उपलब्धि मेहनत और केंद्रित प्रयास से आती है, घंटों के लंबे परिश्रम से नहीं। इस समझ ने उनकी दिशा बदल दी।
IIT और उद्यमशीलता की चिंगारी
चंडीगढ़ में आयोजित (NTSE) कैंप के दौरान उनकी मुलाकात अलबिंदर धिन्डसा से हुई। दोनों ने साथ में IIT की तैयारी की और चयनित भी हुए। IIT दिल्ली में रहते हुए दीपिन्दर ने कई छोटी वेब परियोजनाएँ बनाईं। उनमें से एक विचार, Foodlet.com, आगे चलकर उनके बड़े सपने का आधार बना।
Foodiebay से Zomato तक
पढ़ाई पूरी करने के बाद वे Bain & Company में काम करने लगे। वहीं एक साधारण समस्या से शुरुआत हुई। कार्यालय की कैंटीन में मेनू ढूंढना मुश्किल था। उन्होंने मेनू स्कैन कर ऑनलाइन डाल दिए। यह छोटा प्रयोग Foodlet.in बना, जो बाद में Foodiebay.com और अन्ततः Zomato के रूप में विकसित हुआ।
2009 तक Foodiebay तीन शहरों में फैल गया। दीपिन्दर ने नौकरी छोड़ दी। परिवार चिंतित था, पर दृढ़ निश्चय कायम रहा। संजीव बिकचंदानी के $1 मिलियन निवेश ने यह संघर्ष स्थिर व्यवसाय में बदल दिया।
व्यवसाय का विस्तार: Hyperpure, Blinkit और District
Zomato केवल रेस्तरां खोज मंच नहीं रहा। Hyperpure ने रेस्तरां तक सामग्री की आपूर्ति को सुव्यवस्थित किया। Blinkit ने गति और त्वरित सेवा जोड़ी। 2024 में कार्यक्रम व मनोरंजन सेवाओं को जोड़कर District बनाया गया, जहां भोजन और अनुभव एक साथ जुड़े।
Eternal Ltd: दीर्घकालिक दृष्टि
2025 में Zomato का नाम बदलकर Eternal Ltd रखा गया। यह परिवर्तन केवल औपचारिक नहीं था। यह एक ऐसे संगठन की कल्पना पर आधारित था, जो पीढ़ियों तक टिक सके, केवल बाजार में नहीं, लोगों की स्मृति और दैनिक अनुभवों में।
निष्कर्ष
एक छोटे गाँव से शुरू हुई यह कहानी दिखाती है कि धैर्य, दृष्टि और केंद्रित प्रयास किसी भी यात्रा को असाधारण बना सकते हैं। Zomato केवल एक ऐप नहीं, बल्कि साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया।