पूज्य गुरुदेव प्रोफेसर अनिल गुप्ता जी ने आज अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर (Indian Institute of Technology Indore) ने इंजीनियरिंग शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और नवाचारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संस्थान में प्रथम वर्ष के छात्रों को सिलाई मशीन पर अपना एप्रन (apron) खुद सिलने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो श्रम की गरिमा (dignity of labour) और हाथों से काम करने के महत्व को सिखाती है।
यह अभ्यास छात्रों को इंजीनियरिंग के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशलों से जोड़ता है, जिससे वे भविष्य में बेहतर इंजीनियर बन सकें। हाल ही में, संस्थान ने नवाचार विद्यालय (School of Innovation) का उद्घाटन किया, जो डिजाइन और नवीन विचारों को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। यह विकास इंजीनियरिंग शिक्षा में एक नई क्रांति का संकेत देता है, जहां छात्रों को शुरुआती स्तर से ही रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।
आईआईटी इंदौर (IIT Indore) की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी और यह भारत के 23 आईआईटी संस्थानों में से एक है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित यह संस्थान अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर विशेष जोर देता है। यहां के पाठ्यक्रम छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान करते हैं, जिसमें विज्ञान, इंजीनियरिंग और मानविकी के क्षेत्र शामिल हैं।
प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए शुरू की गई व्यावहारिक गतिविधियां, जैसे एप्रन सिलाई, विनिर्माण प्रक्रियाओं (manufacturing processes) का परिचय देती हैं। छात्र सिलाई मशीन का उपयोग करके अपना एप्रन बनाते हैं, जिससे उन्हें मैनुअल श्रम की चुनौतियां समझ आती हैं। इसके अलावा, पहले सेमेस्टर में ही वे 3डी मॉडल (3D models) बनाने, शीट मेटल फॉर्मिंग (sheet metal forming), कारपेंट्री (carpentry), वेल्डिंग (welding), फाउंड्री (foundry) और मशीनिंग (machining) जैसे कार्यों में भाग लेते हैं। यह दृष्टिकोण छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में लागू करने की क्षमता प्रदान करता है, जो पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा से अलग है।
नवाचार विद्यालय (School of Innovation) का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण घटना थी, जो जुलाई 2025 में हुआ। यह विद्यालय बैचलर ऑफ डिजाइन (Bachelor of Design – BDes) कार्यक्रम प्रदान करता है, जो छात्रों को डिजाइन थिंकिंग (design thinking), उत्पाद विकास और नवीन समाधानों पर ध्यान केंद्रित करता है। विद्यालय का उद्देश्य छात्रों को ऐसे कौशल सिखाना है जो उन्हें उद्योग जगत में प्रतिस्पर्धी बनाएं।
इस उद्घाटन के दौरान, पूरे विश्व के ग्रासरूट्स इनोवेशन (grassroots innovation) गुरु प्रोफेसर अनिल गुप्ता ने संस्थान की इन पहलों की सराहना की। उन्होंने बताया कि ऐसी व्यावहारिक शिक्षा छात्रों में श्रम के प्रति सम्मान पैदा करती है और उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करती है। संस्थान के मेकर स्पेस (maker space) जैसे सुविधाएं छात्रों को अपने विचारों को प्रोटोटाइप (prototype) में बदलने का मौका देती हैं, जो नवाचार को बढ़ावा देता है।
इस पहल के पीछे संस्थान के प्रमुख व्यक्तियों का योगदान उल्लेखनीय है। आईआईटी इंदौर के निदेशक (director) प्रोफेसर सुहास जोशी ने शिक्षा को अधिक हाथों पर आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मार्गदर्शन में दो छात्रों ने गांधीवादी युवा प्रौद्योगिकी नवाचार पुरस्कार (Gandhian Young Technological Innovation – GYTI awards) जीते हैं, जो छात्रों की रचनात्मकता को मान्यता देते हैं।
जी.वाई.टी.आई. पुरस्कार ( गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित छात्र नवाचारों को सम्मानित करते हैं, जिसमें इंजीनियरिंग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र शामिल हैं। मुख्य मेंटर (chief mentor) प्रोफेसर किर्ति त्रिवेदी, जो पहले आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) से जुड़े थे, ने डिजाइन शिक्षा को मजबूत बनाने में सहयोग किया। वहीं, डीन (dean) प्रोफेसर देवेंद्र देशमुख ने मेकर स्पेस की अवधारणा को विकसित किया, जो छात्रों के लिए एक रचनात्मक प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है।
यह दृष्टिकोण न केवल छात्रों को तकनीकी कौशल प्रदान करता है बल्कि उन्हें सामाजिक मूल्यों से भी जोड़ता है। भारत जैसे देश में, जहां इंजीनियरिंग शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक रह जाती है, आईआईटी इंदौर की ये पहलें एक मिसाल पेश करती हैं। भविष्य में, ऐसे कार्यक्रम अधिक छात्रों को प्रेरित कर सकते हैं और देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (innovation ecosystem) को मजबूत बना सकते हैं। संस्थान की ये प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं, जो युवाओं को आत्मनिर्भर और रचनात्मक बनाने में मदद करेंगे।