हिंदी दिवस और हमारी डोगा पुलिस।

बात जरा पुरानी है मेरे मित्र संदीप जी निवासी ग्राम डोभ जिला रोहतक के दादा जी उन्हें हर रोज़ बैठक में अख़बार देकर बैठा देते थे और अख़बार पढ़कर सुनाने को कहते। उसी बैठक में कई बुजुर्ग हुक्का पीते पीते अख़बार सुनते और यह प्रोग्राम हर रोज़ दोपहर में तीन बजे के आस पास चला करता था। एक दिन की बात है संदीप जी ने ख़बर पढ़ी के अमुक स्थान पर दुर्घटना घटी और इतने लोग घायल हुए। दादा जी ने टोका क्या घटी? संदीप जी ने कहा दुर्घटना, दादा जी ने फिर पूछा के घटी? संदीप जी ने कहा …

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निब वाले पेन हमारा बचपन और हम

जब हम स्कूल में पढ़ते थे उस स्कूली दौर में निब पैन का चलन जोरों पर था। तब कैमलिन और चेलपार्क की स्याही प्रायः हर घर में मिल ही जाती थी, कोई कोई टिकिया से स्याही बनाकर भी उपयोग करते थे और जिन्होंने भी पैन में स्याही डाली होगी वो ड्रॉपर के महत्व से भली भांति परिचित होंगे। महीने में दो-तीन बार निब पैन को खोलकर उसे गरम पानी में डालकर उसकी सर्विसिंग भी की जाती थी और लगभग सभी को लगता था की निब को उल्टा कर के लिखने से हैंडराइटिंग बड़ी सुन्दर बनती है। हर क्लास में एक …

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मेरा 9/11 वाला अनुभव

सन 2001, सितम्बर 11 को शाम साढ़े पांच बजे अहमदाबाद से आश्रम एक्सप्रेस में बैठा था दिल्ली के लिए , उन दिनों नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के साथ मिलकर उत्तर भारत के देहातों में ग्रामीण आविष्कारकों और परम्परागत ज्ञान धारकों को ढूँढने और उनकी जानकारियों का डेटाबेस बनाने का काम शुरू करने के लिए प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता जी के साथ प्लान फाइनल करने के बाद ट्रेन में सवार हुआ था | पिछले एक वर्ष में इंडियन आर्गेनिक फ़ूड नईदिल्ली में प्राइवेट नौकरी और दफ्तरी हिसाब किताब जायजा लेने के बाद नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के साथ काम करना ऐसा लग रहा …

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संस्कारों की खेती कैसे की जाती है

सर! मुझे पहचाना?” “कौन?” “सर, मैं आपका स्टूडेंट। 40 साल पहले का “ओह! अच्छा। आजकल ठीक से दिखता नही बेटा और याददाश्त भी कमज़ोर हो गयी है। इसलिए नही पहचान पाया। खैर। आओ, बैठो। क्या करते हो आजकल?” उन्होंने उसे प्यार से बैठाया और पीठ पर हाथ फेरते हुए पूछा। “सर, मैं भी आपकी ही तरह टीचर बन गया हूँ।” “वाह! यह तो अच्छी बात है लेकिन टीचर की तनख़ाह तो बहुत कम होती है फिर तुम कैसे…?” “सर। जब मैं सातवीं क्लास में था तब हमारी कलास में एक वाक़िआ हुआ था। उस से आपने मुझे बचाया था। मैंने …

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डॉ अख्लाक्ष प्रताप सिंह एक बेहतरीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले इंसान

दो दशकों में बहुत कुछ बेशक़ बदल जाता है। बस नही बदलता तो वो है सीनियर्स और जूनियर्स का बेशुमार प्यार और रिगार्ड और सीखने जानने बताने कहने सुनने की बेशुमार चाहत। डॉ अख्लाक्ष प्रताप सिंह जी हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में हमारे से इमिजेट सीनियर बैच में थे और मेरी पिछली मुलाक़ात इनसे साल 2000 में बस ऐसे ही चलते फिरते हुई थी। डॉ साहब उस जमाने मे भी बायोकेमिस्ट्री के ठीक ठाक विद्वान हुआ करते थे और इनकी विद्वत्ता इन बीते दो दशकों में कितनी गहराई होगी आप उसका ठीक ठाक अंदाजा लगा ही सकते हैं। फ़ूड केमिस्ट्री, ह्यूमन …

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उपवास का महत्वऔर प्लेसिबो की खोज

डॉक्टर रसेल ट्रॉल यह पहले अमेरिकन एलोपैथिक डॉक्टर थे। सरकारी डॉक्टर होने के नाते वो गांव गांव जाकर बीमार लोगों को दवाइयां देते थे। एक दिन उन्होंने देखा कि एक महिला बहुत ही गंभीर बीमार है। उन्होंने चेक किया और उनके घर वालों को बताया कि वो महिला 1 हफ्ते से ज्यादा दिन जीवित नहीं रह सकेगी, इसलिए उन्होंने उसे कोई भी दवा नहीं दी। उसे उसके हाल पर छोड़ दिया गया। 15 दिन के बाद डॉक्टर ट्रॉल फिर उसी गांव में विजिट देने गए।तब उन्होंने देखा कि जो महिला 1 हफ्ते के भीतर मरनेवाली थी वो तो जीवित है …

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हमारे कौरव पाण्डव और हमारा महाभारत

जयवीर रावत शास्त्र कहते हैं कि अठारह दिनों के महाभारत युद्ध में उस समय की पुरुष जनसंख्या का 80% सफाया हो गया था। युद्ध के अंत में, संजय कुरुक्षेत्र के उस स्थान पर गए जहां संसार का सबसे महानतम युद्ध हुआ था। उसने इधर-उधर देखा और सोचने लगा कि क्या वास्तव में यहीं युद्ध हुआ था? यदि यहां युद्ध हुआ था तो जहां वो खड़ा है, वहां की जमीन रक्त से सराबोर होनी चाहिए। क्या वो आज उसी जगह पर खड़ा है जहां महान पांडव और कृष्ण खड़े थे? तभी एक वृद्ध व्यक्ति ने वहां आकर धीमे और शांत स्वर …

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जेंथिप, भामती और भारती के बहाने

कुमारी वंदना सुकरात के बारे में प्रचलित है कि उनकी पत्नी बहुत कर्कशा थी। एक बार जब उसने भोजन करने के लिए सुकरात को आवाज दी, सुकरात अपने शिष्यों से चर्चा में मगन थे। जब बारबार आवाज देने पर भी वे नहीं गए तो सुकरात की पत्नी ने आकर उन पर पानी उड़ेल दिया (पानी की जगह कहीं कहीं चाय और कहीं कहीं कीचड़ का भी उल्लेख मिलता है)। सब दंग रह गए तो सुकरात ने कहा – मेरी पत्नी कितनी करुणामयी है, गर्मी से राहत देने मुझपर पानी उड़ेल गयी। वैसे तो इस कथा में सुकरात के सहिष्णु पक्ष …

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आप मैं हम और देश की आर्थिकी

देश मे एक संविधान है और हज़ारों कानून हैं जो यह सोच कर और मान कर घड़े लिखे गए हैं कि अथॉरिटीज तो देवता हैं और आम जनता चोर है डाकू है। ऑथोरिटी कदे भी गलत काम नही करती और कर सकती। देश ने एक कम्पनी बनती है जो बनते ही इनकम टैक्स कानून, GST कानून और कंपनीज एक्ट के तहत देश के संविधान के दायरे में काम करने लगती है। कम्पनी के लिए सरकार ने एक Statutary ऑडिटर का प्रावधान किया हुआ है जिसे कम्पनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स लगा तो अपनी मर्जी से सकते हैं लेकिन हटा नही …

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चींटियों का सहज समझ ज्ञान

डॉ० जयवीर सिंह अध्यक्ष महर्षि सुश्रुत चिकित्सा संस्थानएवं वन्य जीव संरक्षण एवं अनुसंधान संस्थान वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि चींटियां अनाज और बीजों को जमा कर जमीन में रखने से पहले उन्हें दो टुकड़ों में तोड़ देती हैं। क्‍योंकि यदि दाना या बीज दो टुकड़ों में न टूटे, तो वह भूमि में उगकर पौधा बन जाएगा। उन्होंने हैरानी से कहा कि चींटियां धनिये के बीज को चार भागों में काटती हैं क्योंकि धनिये का एक ही बीज होता है जो दो भागों में काटने के बाद भी अंकुरित हो सकता है। तो चींटियों ने इसे चार भागों में काट …

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