Creative News Bulletin 12 January 2022

गोल्डन लेटर बॉक्स भारतीय डाक विभाग ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए ओलिंपिक गोल्ड मैडल विजेता नीरज चोपड़ा के गाँव खंडरा में घर से कुछ दूरी पर एक बड़ा लेटर बॉक्स लगाया है जिसे सुनहरी (गोल्डन) रंग में रंगा गया है । गोल्डन लेटर बॉक्स लगाने की योजना के पीछे विचार यह है कि ओलिंपिक गोल्ड विजेता के मान सम्मान के साथ डाक विभाग ने अपनी पहचान जोड़ी है ताकि नीरज की उपलब्धियों से न सिर्फ गाँव के सभी युवाओं को अपितु देश के सभी युवाओं को प्रेरणा मिले और उन्हें इस बात का एहसास हो कि डाक विभाग …

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हिंदी में हैं अनन्त संभावनाएं – विश्व हिंदी दिवस 2022

भूमिका हिंदो भाषा के वैश्विक भाषा के रूप में प्रचार प्रसार के लिए पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था जहां 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। लेकिन इस दिन विश्व हिंदी दिवस मनाने की अधिकारिक घोषणा वर्ष 2006 में हुई थी, जिसके बाद हर साल 10 जनवरी को, विश्व हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। संयुक्त राष्ट्र की शैक्षिक और सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को के अनुसार, विश्व में 7,000 से अधिक भाषाएं है जिसमें भारत की 1635 मातृभाषाएं व प्रमुख 22 भाषा को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। हिंदी समूह भाषियों की अनुमानित …

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बुल्ली बाई एप्प

भूमिका इंटरनेट पर www.github.com एक ऐसा मंच है जहां पर वेब और एप्प डेवेलोपेर्स आपस मे इंटरेक्शन एवं कोड शेयरिंग करते हैं। लेकिन यह मंच एक बड़े बेहूदे मामले में आज चर्चा में आया है। इस मंच पर एक मोबाइल एप्प की नीलामी रखी गयी जिसका नाम बुल्ली बाई एप्प था। मसला मामला यह है कि उत्तराखंड की एक युवती जो अभी मात्र 18 साल की है जिसके माता पिता का देहांत हो चुका है और वो तीन बहनों में से दूसरे नम्बर पर है और एक बिहार का रहने वाला इंजीनियरिंग का छात्र जो बेंगलुरु में पढ़ता है दोनों ने मिलकर …

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रसूख क्या होता है जीवन में इसके क्या मायने होते हैं।

सुनीत धवन मेरा बहुत पुराना साथी है और एक सही मायनों में पत्रकार है जिसने सच्ची पत्रकारिता से अपनी पहचान स्थापित की है और एक ऐसा प्रभाव कायम किया है जिसे देख कर लगता है कि पत्रकारिता भी एक सम्मानजनक कैरियर है। दीपावली की छुट्टियों में मेरा रोहतक आना हुआ और हम सारे भाई इक्कठे हो गए। इधर उधर की कई बातों के बाद अचानक रसूख शब्द पर बातें होने लगी तो सुनीत भाई ने रोहतक मेडिकल कॉलेज के एक पुराने और बहुत मशहूर डॉ विद्यासागर जी से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। सुनीत भाई ने बताया कि रोहतक मेडिकल कॉलेज …

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दीपावली पटाखे और दीपावली मनाने वाले और इनके नाम पर रोने वालों की दवाई

शोर शराबे धुएं और प्रदूषण का रौला रप्पा 2021 की दीपावली बीत गयी है और तमाम कोर्ट कचहरियों के बैन और पर्यावरणविदों की मार्मिक अपीलों के बावजूद दीपावली मनाने वालों ने दीपमाला करने के बाद ठीक ठाक मात्रा में पटाखे छोड़े और आज सुबह गलियां कूड़े से और आसमान स्मॉग से भरा पड़ा है। दीपावली और पटाखों का क्या कनेक्शन है इसका कोई शास्त्रीय प्रमाण ढूंढने जाएंगे तो नही मिलेगा। फिर ये पटाखे चलाने जा रिवाज़ कैसे विकसित हुआ और आज इसका क्या सिगनीफ़िकेन्स है और क्या रेल्व्वेन्स नज़र आती है इसके बारे में आज इस लेख के माध्यम से …

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आखिर मोदीजी नये कृषि कानूनों को वापिस क्यों नही ले रहे ?

देश में किसान आन्दोलन को लगभग एक वर्ष होने को आया है जिसमें किसानों के प्रतिनिधि कई दौर की बैठकें सरकार के साथ कर चुके हैं और जिनका कोई नतीजा नही निकला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन कानूनों को वापिस लेने को तैयार नही हैं और उनका अड़ियल रुख देशवासियों के सामने एक सवाल बना हुआ है। इस लेख में मैं कुछ हाल फिलहाल में प्राप्त आंकड़ों के एनालिसिस के द्वारा यह समझने का प्रयास करूंगा कि ऐसी कौन सी संभावित वजहें हो सकती हैं जिनकी वजह से प्रधानमंत्री मोदी इन कृषि कानूनों को कैंसिल नही कर रहे हैं। …

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धौले एंड काले कानून और किसानपुत्र की व्यथा का व्यावाहरिक पक्ष ग्रामीण भारत की तकलीफ

मेरे एक अजीज साथी हैं सांगवान साहब जिनसे मेरा परिचय फेसबुक के माध्यम से हुआ था और मुझे उनका स्वभाव और विचार ठीक लगे और मेरी उनसे कब दोस्ती हुई और पारिवारिक भाईचारे में बदल गयी पता ही नही चला। मेरे पास वो कई बार चंडीगढ़ आये और मुलाकातें होती रही और मुझे उनकी अपने भविष्य को बनाने सम्बंधित आकांक्षाओं और योजनाओं का पता चलता रहा। बीच बीच में कई बार मेरी उनसे चर्चा बिजनेस सेटअप को लेकर हो जाया करती थी और पिछले एक डेढ़ साल में मैं दो बार उनके घर भी गया और उनके साथियों से भी …

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शूद्र एक घृणित सम्बोधन कब हुआ किसने किया और कैसे किया क्यों किया ? एक विश्लेषण

त्रिभुवन सिंह ऋग्वेद मे लिखा है ब्राम्हण्म मुखम आसीत शूद्रह अजायत। अर्थात परंब्रम्ह की जिह्वा है ब्रामहण । यानि जो तपस्या (रेसेर्च ) से जो मांनव कल्याण हेतु जो मंत्र खोजे जाते है , उसी को जिह्वा से जगत मे प्रचारित प्रसारित करने वाले को ही ब्रामहण कहते हैं । दूसरी बात उस परम्ब्रंह की उपासना जब कोई करता है तो उसके चरण को ही प्रणाम कर चरणामृत लेता है , उसके मुहं की उपासना नहीं न करता। कौटिल्य ने लिखा – स्वधर्मों शूद्रस्य द्विजस्य सुश्रुषा वार्ताकारकुशीलव कर्मम च ।अर्थात सर्विस सैक्टर , मैनुफेक्चुरिंग ,एंजिनियरिंग, पशुपालन, खनिज दोहन और व्यापार …

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गौपालन गौसंरक्षण गौसंवर्धन गौशालाएं और कानूनी अडचनें और संभावनाएं

महक सिंह तरार और कमल जीत भूमिका गाय सनातन की आर्थिक धुरी है और धर्म के मूल में जो अर्थ होता है वह असल में गाय ही होती है। चूंकि गाय सनातन इकनोमिक सिस्टम की करंसी है इसी लिए जो हालात आज गाय की हो रखी है वही हालात हमारी करंसी अरतार्थ मुद्रा के हो रखे हैं मतलब कोई पूछता ही नही है हमारे ऋषि मुनियों ने बड़ी शोध करके गाय को पहचाना और फिर गाय को विकसित किया। गाय एक ऐसा जीव है जो जीरो डिग्री तापमान से लेकर पैंतालिस पचास डिग्री तापमान तक बड़े आराम से बिना किसी …

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एक सीधा सवाल देश के किसानों से

इस देश में आत्मविश्वाश और आत्म निर्भरता का रास्ता केवल और केवल और खेतों से जाता है। हम जैसे नौकरी पेशा, बिना जमीन और बिना गाय वाले लोग संडे को सपरिवार खेतों में घूमने चले जाएं तो सड़कों और मॉल्स में से भीड़ छंट जाएगी और खेतों में रौनकें बढ़ेंगी। वहां अपन को फुलस्टॉप लगा देना मांगता है क्योंकि सभ्यता का चरम है वो उससे आगे संस्कार और मर्यादायें और संस्कृति की दुनिया शुरू होती है। फोटो लगभग तीन साल पुरानी है जब भाई Ajay Jangra जी कुरुक्षेत्र में जैविक खेतों की सैर कराने ले गए थे। सवाल किसांनो से …

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