महाराजा रणजीत सिंह का अंतिम संस्कार

महाराजा का देहावसान महाराजा रणजीत सिंह जी को अधरंग हुआ था और वे 27 जून 1839 को स्वर्ग सिधार गये। उनका अंतिम संस्कार 28 जून 1839 को लाहौर में हुआ था। उनकी चार रानियाँ और सात दासियाँ महाराजा के मृत शरीर के साथ चिता पर सती हुई थी। महाराजा रणजीत सिंह जी का राज भारत में खालसा राज के रूप में सर्वमान्य है। सिख गुरुओं ने हमेशा सती प्रथा का विरोध ही किया है सभी गुरुओं ने इसके बारे में खुल कर अपने विचार रखे हैं। यह ऐतिहासिक घटना किन हालातों में घटी उसके बारे में ज्यादा इनफार्मेशन उपलब्ध नही …

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प्रासंगिक हैं राष्ट्रनायक राजा महेंद्र प्रताप

मथुरा से जब आप हाथरस की ओर चलेंगे तो हाथरस जिले में प्रवेश करते ही एक कस्बा पड़ेगा मुरसान। मुरसान एक छोटा सा कस्बा है। वहां के राजा थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह। राजा महेंद्र प्रताप उन विलक्षण और प्रतिभाशाली स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में से एक रहे हैं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ भारत के बाहर आज़ादी की मशाल और स्वतंत्र चेतना को जगाये रखा। उनका जन्म 1 दिसंबर 1896 को और मृत्यु 29 अप्रैल 1979 को हुयी थी। वे मथुरा से आज़ादी के बाद सांसद भी रहे हैं। वे स्वाधीनता संग्राम के सेनानी के साथ-साथ पत्रकार, लेखक और …

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हल्दीघाटी युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने वाले प्रमुख मेवाड़ी योद्धा

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को मेवाड़ के महाराणा प्रताप का समर्थन करने वाले घुड़सवारों और धनुर्धारियों और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच लडा गया था हल्दीघाटी का युद्ध 1) ग्वालियर के राजा रामशाह तोमर 2) कुंवर शालिवाहन तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र व महाराणा प्रताप के बहनोई) 3) कुंवर भान तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र) 4) कुंवर प्रताप तोमर (रामशाह तोमर के पुत्र) 5) भंवर धर्मागत तोमर (शालिवाहन तोमर के पुत्र) 6) दुर्गा तोमर (रामशाह तोमर के साथी) 7) बाबू भदौरिया (रामशाह तोमर के साथी) 8) खाण्डेराव तोमर (रामशाह तोमर के साथी) 9) बुद्ध सेन (रामशाह …

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भारतीय इतिहास के उलझे हुए मसले और इतिहासकार इरफान हबीब और रोमिला थापर के नाम एक खत

विजय मोहन वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब और रोमिला थापर को कुछ समय पहले एक चिट्ठी लिखी थी। मैंने उन्हें लिखा है कि आज इतिहास को लेकर भारतीयों में पहले से ज्यादा जागरूकता है। इंटरनेट ने तथ्यों को उजागर करने में बहुत मदद की है। आखिर ऐसा क्या सच सामने आ गया है कि एक समय इतिहास लेखन में इरफान हबीब और रोमिला थापर जैसे बड़े प्रतिष्ठित नाम आज आम लोगों के लिए गाली बन गए हैं। कभी सोचें कि लोग क्यों आप पर लानतें भेज रहे हैं? हो सके तो जवाब दें। पूरी चिट्ठी इस प्रकार है: आदरणीय इरफान हबीब …

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कहाँ से आये ब्राह्मण और सब क्यों उनके पीछे पड़े हैं?

हरि गुप्ता ब्राह्मण ने समाज नहीं बनाया। समाज ने ब्राह्मण बनाया। भारत में किसी साजिश के तहत ये बात स्थापित की गयी है कि ब्राह्मणों ने अपने मुताबिक समाज बनाया और उसके शिखर पर जाकर बैठ गया। ये असत्य और अन्यायपूर्ण कथन है। वास्तविकता ये है कि समाज ने ब्राह्मण बनाया। समाज ने एक संरचना विकसित की जिसमें धर्म को शिखर पर रखा। कला, विद्या और धर्म इन तीनों का सम्यक बंटवारा है भारतीय समाज। कला का अर्थ है हर प्रकार की कला। निर्माण, उद्योग और उत्पादन ये सब कला का अंग हैं। विद्या का अर्थ है परंपरा में संरक्षित …

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नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री मैना कुमारी के बलिदान की कहानी।

3 सितम्बर 1857 बिठूर में एक पेड़ से बंधी 13 वर्ष की लड़की को, ब्रिटिश सेना ने जिंदा ही आग के हवाले किया, धूँ धूँ कर जलती वो लड़की, उफ़ तक न बोली और जिंदा लाश की तरह जलती हुई, राख में तब्दील हो गई। ये लड़की थी नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री मैना कुमारी जिसे 160 वर्ष पूर्व, आज ही के दिन, आउटरम नामक ब्रिटिश अधिकारी ने जिंदा जला दिया था। जिसने 1857 क्रांति के दोरान, अपने पिता के साथ जाने से इसलिए मना कर दिया, की कही उसकी सुरक्षा के चलते, उस के पिता को देश सेवा …

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न्यूजीलैंड में निर्दोष लोगों को दण्डित करने वाला मोहम्मद शमशुद्दीन अहमद आदिल

मोहम्मद शमशुद्दीन अहमद आदिल ने बीते रविवार को न्यूज़ीलैंड में छह निर्दोष लोगों को चाकू से हमला करके दण्डित करके घायल कर दिया था। यह दंड निर्दोष लोगों को पिछले लगभग डेढ़ हज़ार सालों से लगातार दिया जा रहा है । इस हमले के बाद न्यूजीलैंड की ख़ुफ़िया पुलिस के कमांडों की गोली से उसकी मौत हो गई और उसकी मौत की घोषणा न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न के द्वारा की गयी। श्रीलंका का रहने वाला आदिल 2011 में स्टूडेंट वीज़ा पर पढ़ाई करने न्यूज़ीलैंड गया था लेकिन, उनकी पहचान चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के एक समर्थक युवा की बन …

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रेज़ांग ला में लड़ने वाली चार्ली कंपनी का हर जवान हीरो था

राजीव पुरोहित बात फ़रवरी 1963 की है. चीन से लड़ाई ख़त्म होने के तीन महीने बाद एक लद्दाखी गड़ेरिया भटकता हुआ चुशूल से रेज़ांग ला जा पहुंचा। एकदम से उसकी निगाह तबाह हुए बंकरों और इस्तेमाल की गई गोलियों के खोलों पर पड़ी. वो और पास गया तो उसने देखा कि वहाँ चारों तरफ़ लाशें ही लाशें पड़ी थी वर्दी वाले सैनिकों की लाशें। “किसी की राइफ़ल टूट कर उड़ चुकी थी, लेकिन उसका बट उसके हाथों में ही था। हुआ ये था कि लड़ाई ख़त्म होने के बाद वहाँ भारी हिमपात हो गया और उस इलाके को ‘नो मैन्स …

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भारत की इस्लामी फतह : विल ड्यूरन्ट

यह लेख, विल ड्यूराण्ट के The Muslim Conquest of India का गूगल ट्रांसलेशन है, केवल व्याकरण की भूलें सुधारी हैं। विल ड्यूराण्ट अमेरिकन इतिहास लेखक थे, आप उनके बारे में गूगल पर Will Durant सर्च कर के अधिक जानकारी ले सकते हैं। उनके ग्रंथ नेट पर मिल जाएँगे, A Case For India भी उपलब्ध है। लेख लंबा है, लेकिन अवश्य पढ़ें। अनवाद करने का कष्ट इसलिए किया है क्योंकि इंग्लिश कम लोग पढ़ पाते हैं । अत: इसे अवश्य पढ़ें और मित्रों तक भी पहुंचाएँ। आज जो इन लोगों को अपने पूर्वज मानना चाहते हैं उनकी मानसिकता का विश्लेषण अन्य …

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भारत में जातिवाद अंग्रेजों का बिछाया हुआ एक षड्यंत्र और उसकी काट

भारत के इतिहास मे कहीं भी देखा जाए जीवन को सही ढंग से उत्पादक वर्ग ने ही जिया है जिसका सबूत है वर्तमान में उनकी जनसंख्या। भारत में आज भी ब्राह्मण थोड़े से ही हैं और समाज ने इन्हें कमाने का अधिकार इनसे छीन लिया क्योंकि ऋषि जानते थे कि ज्ञान और धन दोनों मिलकर बन्दे को बंदा नही रहने देते राक्षस में बदल देते हैं उदहारण बिल गेट्स। दूसरे उन्होंने अपने अनुभव से यह जान लिया था कि ज्ञान का घमंड मनुष्य को पागल ना कर दे इसीलिए ज्ञानी पुरुषों के लिए भिक्षा अनिवार्य कर दी गयी और भिक्षा …

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