Bluetooth and Karn Pishchani

ब्लूटूथ और कर्णपिशाचनी साल 2014 की बात है हम CABI डायरेक्ट टू फार्म प्रोजेक्ट के आखिरी राउंड में थे जिसमें 3 महीनों में लगभग 4 लाख किसानों का प्रोफाइल तैयार किया जाना था और तब न दिन का पता होता था और न रात का, अक्सर दिल्ली मीटिंग्स में भी जाना पड़ता थाऔर रातों रात सफ़र करके सुबह दिल्ली पहुंच जाया करते थे। नवम्बर 2014 की वो कोई रात थी और रात को एक दस पर चंडीगढ़ से चलने वाली कालका मेल पकड़नी थी और मैं बस  बड़ी ही बेतरतीबी वाली हालत में दफ्तर से ही भाग कर आया था। …

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मरना परना अते किसान कारीगर ते समाज

भूमिका बात साल 2004 की है तब दिल्ली में मैं सरदार मोहिंदर सिंह ग्रेवाल जो भारत सरकार के कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कास्ट्स एंड प्राईसेज में बतौर फार्मर मेम्बर सेवाएँ दे रहे थे के साथ बतौर गेस्ट उनके सरकारी रेसिडेंस पर रहा करता था। मैं उनके लिखने पढने के काम में उन्हें थोड़ा बहुत सहयोग भी कर दिया करता था और इसी बहाने मुझे खेती किसानी के मसलों पर उनके जीवन के निचोड़ भी सीधे सीखने को मिल जाया करते थे। मैंने यह बात उन्ही से सुनी थी कि किसान समाज की मर का मुख्य कारण मरना और परना हैं। मतलब …

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डोभ वाली क्रिएटिव दादी गंगा देवी

मेरे जीवन मे जब जब ज्ञान से अपनी जीने की राह निकालने का सवाल आता है तो सबसे ऊपर दादी गंगा देवी जी का नाम आता है। दादी गंगा देवी ने बचपन मे खेतों में काम करते करते स्कूल के आते जाते बच्चों के साथ खेल खेल कर गिनती पहाड़े सीख लिए,बिल्कुल अनपढ़ होने के बावजूद कैलकुलेशन में एक दम परफेक्ट थी। इनका विवाह रोहतक जिले के डोभ गांव में श्री होशियार सिंह हुड्डा जी के साथ हुआ , दादी बताती हैं के थारा दादा पाली था और उसने हिसाब किताब का किमे ज्ञान न था, सारा हिसाब किताब और …

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एक सीधा सवाल देश के किसानों से

इस देश में आत्मविश्वाश और आत्म निर्भरता का रास्ता केवल और केवल और खेतों से जाता है। हम जैसे नौकरी पेशा, बिना जमीन और बिना गाय वाले लोग संडे को सपरिवार खेतों में घूमने चले जाएं तो सड़कों और मॉल्स में से भीड़ छंट जाएगी और खेतों में रौनकें बढ़ेंगी। वहां अपन को फुलस्टॉप लगा देना मांगता है क्योंकि सभ्यता का चरम है वो उससे आगे संस्कार और मर्यादायें और संस्कृति की दुनिया शुरू होती है। फोटो लगभग तीन साल पुरानी है जब भाई Ajay Jangra जी कुरुक्षेत्र में जैविक खेतों की सैर कराने ले गए थे। सवाल किसांनो से …

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हिंदी दिवस और हमारी डोगा पुलिस।

बात जरा पुरानी है मेरे मित्र संदीप जी निवासी ग्राम डोभ जिला रोहतक के दादा जी उन्हें हर रोज़ बैठक में अख़बार देकर बैठा देते थे और अख़बार पढ़कर सुनाने को कहते। उसी बैठक में कई बुजुर्ग हुक्का पीते पीते अख़बार सुनते और यह प्रोग्राम हर रोज़ दोपहर में तीन बजे के आस पास चला करता था। एक दिन की बात है संदीप जी ने ख़बर पढ़ी के अमुक स्थान पर दुर्घटना घटी और इतने लोग घायल हुए। दादा जी ने टोका क्या घटी? संदीप जी ने कहा दुर्घटना, दादा जी ने फिर पूछा के घटी? संदीप जी ने कहा …

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डॉ अख्लाक्ष प्रताप सिंह एक बेहतरीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले इंसान

दो दशकों में बहुत कुछ बेशक़ बदल जाता है। बस नही बदलता तो वो है सीनियर्स और जूनियर्स का बेशुमार प्यार और रिगार्ड और सीखने जानने बताने कहने सुनने की बेशुमार चाहत। डॉ अख्लाक्ष प्रताप सिंह जी हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में हमारे से इमिजेट सीनियर बैच में थे और मेरी पिछली मुलाक़ात इनसे साल 2000 में बस ऐसे ही चलते फिरते हुई थी। डॉ साहब उस जमाने मे भी बायोकेमिस्ट्री के ठीक ठाक विद्वान हुआ करते थे और इनकी विद्वत्ता इन बीते दो दशकों में कितनी गहराई होगी आप उसका ठीक ठाक अंदाजा लगा ही सकते हैं। फ़ूड केमिस्ट्री, ह्यूमन …

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खेती विरासत मिशन के मंथन से उपजा है देसी ब्रांड त्रिंजन

माता गुरचरण कौर जी कहती हैं कि मैं चरखा चला कर सूत कातने के साथ साथ अपना दुःख काट लेती हूँ।इस चरखे का महत्व हम न खुद समझ सके और न देश की मुख्य धारा में इसको शामिल कर सके।हमारे गांवों में बसे बढई देवता किस स्तर के सिद्धहस्त और तकनीकी लोग हैं। इसका पता उनके बनाये हुए यंत्रों को देख कर पता चलता है। हमने अपने पूरे एजुकेशन सिस्टम को सिर्फ नौकरी मांगने वाले बेरोजगार बनाने के हिसाब से क्रिएट किया है।गांधी जी मे चरखा चला कर आत्मिक बल आ जाया करता था लेकिन हमने चरखे का मूल्य नही …

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फ़ूड फ़ॉर थॉटस वर्टिकल फार्मिंग

वर्टिकल फार्मिंग आज कोई नया सब्जेक्ट बेशक़ होगा लेकिन हरियाणा पंजाब के देहातों में ये आदिकाल से होती आई है। जो बात सबसे बेहतर है वो यह है कि तकनीक के किसी एक पक्ष को इतना हावी नही किया जाता है कि वो त्रास बन जाये। तकनीक को साधारण सरल और सुघड़ रखना किसानों को बखूबी आता था लेकिन ज्ञान से विमुख करने वाले विज्ञान ने जब से प्रोडक्ट्स एंड सर्विसेज का बफ़े समाज मे प्रस्तुत किया है सब सिस्टम गोलमाल सा हो गया है। चार बार गुल्ली डंडे की स्प्रे करने के बाद भी किसान कहता है कि गुल्ली …

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किसान कम्पनियों के मसले और समाधान

आज दिनांक 28 अगस्त 2019 को नीलोखेड़ी करनाल में स्थित एक्सटेंशन एजुकेशन इंस्टीटूट जिसे भारत सरकार का कृषि मंत्रालय हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मार्फ़त संचालित करता है में जम्मूकश्मीर, उत्तराखंड, और हरियाणा से आये हुए मिडल लेवल एक्सटेंशन फंकक्शनरीज के साथ चर्चा करने का अवसर मिला। विषय था एक्सटेंशन स्ट्रेटेजीस फ़ॉर लिंकिंग फार्मर्स विद एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज़।प्रोग्रोवेर्स प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड तरावड़ी करनाल के निदेशक भाई Vikas Chaudhary जी से निवेदन किया कि वे भी लेक्चर में बतौर फैकल्टी आएं और चर्चा में भाग लें। चर्चा का आगाज़ इस बात किया गया कि हमें फार्मर्स को एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से जोड़ने …

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जब टोटा मेरे बहुत काम आया

बात चार साल पुरानी है जब साल 2017 में हम एप्पल प्रोजेक्ट में हिमाचल में काम कर रहे थे और हिमाचल के बहुत अंदरूनी हिस्सों में पहली बार घूम कर सेब के किसानों से मिल रहे थे। अगस्त महीने की तारीख रात में जीरकपुर से चल कर नारकंडा पहुंचे और जा कर एक बड़े मुश्किल से नाम वाले होटल Tethys Resorts में कमरा ले लिया। देर रात पहुंचे थे तो रिसेप्शन का स्टाफ छुट्टी कर चुका था और पूरा रिसोर्ट वेटर्स के हवाले था , किराए की बातचीत किये बिना ही टिक गये, होटल में लाइट नही थी और पूरे …

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