दाल और मेहमान

एक बार की बात है एक आदमी अपणी घरआली तै बोल्या: आज मेरे दफ्तर के यार खाणा खाण आवेंगे कीमे आछ्या बणा लिए घरआली बोली: जी घर नै तो कीमे ना बच रहया बस दाल ए सै! आदमी बोल्या बस तू दाल ए बणा लिए और वे आवेंगे जद भीतर तै बर्तन नीचै पटके जाइए, मैं कहूँगा के होया तूकहिये खीर पड़गी, फेर कहिये हलवा पड़ग्या, नु करदे करदे सारी चीज गिणा दिए! फेर मैं कहूँगा के बच्या सै तू …

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शेरो शायरी कलेक्शन

हरियाणा कृषि विश्विधालय में मैं साल 1997 से लेकर मार्च 2000 तक बतौर डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी का छात्र रहा और साल 1998 में हमारे से जूनियर बैच में एक साथी आया महावीर डांगी। जो डॉ डैंग के नाम से हमारे आपसी जूनियर सीनियर भाई चारे में आगे चलकर मशहूर हुआ। महावीर की खासियत यह थी कि उसे सैंकड़ों हज़ारों शेर याद थे और किसी भी स्थिति पर वो शेर सुना सकता था। मैं हमेशा यह सोचता था …

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ताई की गवाही आला मुकद्दमा

एक बार एक मुक्कदमे में ताई गवाह बना दी ! ताई जा के कटघरे में खड़ी हो गयी और बाई चांस दोनू वकील भी ताई के गाम के ही थे पहले वकील नै बात शुरू करण के मारी ताई तै पूछ्या “अक ताई तू मन्ने जाने है? ताई बोली “हाँ रै तू रामफूल का है ना तेरा बाबू तो भाई घणा सूधा आदमी था पर तू कत्ति निक्कमा लिकडया मन्ने सुण्या है तू नम्बर का झूठा है और झूठ बोल …

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ताऊ रामफल और स्वर्ग की चाह

एक बार की बात है के ताऊ रामफल का अच्छा ब्योंत हो गया और जब पैसे पूसे ठीक ठाक हो गए तो ताऊ रामफल ने अपने सारे शौक़ पूरे कर लिए डबल एम् ऐ की पढ़ाई से ले कर सारे महंगे सस्ते शौक़ आजमा लिए लेकिन दिल नहीं भरा फेर भी कसर रह गयी , एक दिन टी.वी. पर रामायण देखते देखते ताऊ ने सोच्या के अक अब भगवान् की प्राप्ति करणी चाहिए। किताब कुतूब पढ़ कै देखि लेकिन कोई …

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